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बेटियों, बहनों, माताओं सबका
अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस आज है,
मातृशक्ति वंदन क़ानून बना है,
आप सभी को अनंत बधाईयाँ हैं।
आधी आबादी को पचास प्रतिशत
आरक्षण अधिकार मिलना चाहिये,
जिसकी जितनी जनसंख्या, उसको
उतनी ही भागीदारी मिलनी चाहिये।
आरक्षण जैसी यह आवश्यकता,
आख़िर क्यों आन पड़ी भारत में है,
विभिन्न जाति-वर्ग-भाषा के लोग हैं,
पर सबके अधिकार समान नहीं हैं।
बेटियाँ नहीं शिक्षित हो पाती हैं,
बेटों को सुविधायें मिल जाती हैं,
बेटे पढ़लिख कर आगे बढ़ जाते हैं,
बेटियाँ घरों तक सीमित रह जाती हैं।
बेटियों को अवसर जब मिलता है,
सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, गार्गी और
गायत्री, सीता बनकर दिखलाती हैं,
रानी झाँसी लक्ष्मी बाई बन जाती हैं।
आज विश्व भर में इन्ही बेटियों ने
अपने दम पर परचम लहराया है,
आदित्य बेटियाँ मातृशक्ति होती हैं
ईंट के मकान को घर बना देती हैं।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र “आदित्य”
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