मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से संचालित उत्तर प्रदेश लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के तहत प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासन ने पीड़ितों को क्षतिपूर्ति प्रदान करने से संबंधित मामलों पर विस्तृत चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
यह बैठक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। बैठक में कुल 29 प्रकरणों पर चर्चा की गई, जिनमें से 10 मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि 9 मामलों को अस्वीकृत किया गया। इसके अलावा 19 मामलों को लंबित रखते हुए आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मामलों की बारीकी से हुई जांच
बैठक के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा योजना के तहत प्राप्त सभी प्रकरणों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और पात्रता मानकों की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों ने पीड़ितों की स्थिति, उपलब्ध साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केवल पात्र पीड़ितों को ही योजना का लाभ मिले और किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता न किया जाए। समीक्षा के दौरान कई मामलों में दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों का गहन अध्ययन किया गया।
9 मामलों को किया गया अस्वीकृत
बैठक में समीक्षा के बाद कुल 9 मामलों को अस्वीकृत किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इनमें से 6 मामलों में संबंधित व्यक्तियों को न्यायालय से दोषमुक्त घोषित कर दिया गया था, जिसके कारण वे योजना के तहत क्षतिपूर्ति के पात्र नहीं पाए गए।
इसके अतिरिक्त 3 मामलों में पात्रता मानकों की पूर्ति नहीं होने के कारण आवेदन अस्वीकार कर दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ केवल उन्हीं पीड़ितों को दिया जाएगा जो निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं।
10 मामलों को दी गई स्वीकृति
बैठक में समीक्षा के दौरान 10 मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत मामलों में क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
प्रशासन का मानना है कि आर्थिक सहायता से पीड़ित महिलाओं और बच्चों को मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत होने में मदद मिलती है। यह योजना पीड़ितों के पुनर्वास और उनके जीवन को सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
19 लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के निर्देश
बैठक में 19 मामलों को लंबित रखा गया, जिनमें कुछ आवश्यक औपचारिकताएं और दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों में आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए।
उन्होंने कहा कि लंबित मामलों में देरी से पीड़ितों को नुकसान होता है, इसलिए समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने लंबित मामलों की समीक्षा के लिए जल्द ही पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
योजना का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाना
उत्तर प्रदेश लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना का मुख्य उद्देश्य अपराध से प्रभावित महिलाओं और बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत गंभीर अपराधों के पीड़ितों को सहायता राशि प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने जीवन को पुनः व्यवस्थित कर सकें।
यह योजना महिलाओं और बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करती है। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रशासन ने पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर दिया जोर
बैठक के दौरान अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी मामलों की जांच निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पीड़ितों को योजना से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा
बैठक में संयुक्त निदेशक अभियोजन, जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, पुलिस विभाग के अधिकारी और जिला प्रोबेशन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वय बनाकर कार्य करने पर जोर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि योजना के बेहतर संचालन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। इससे मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव हो पाता है और पीड़ितों को समय पर सहायता मिलती है।
पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
प्रशासन द्वारा आयोजित यह बैठक महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि योजना के माध्यम से पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र पीड़ित योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
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