स्किल्ड वर्कफोर्स के दम पर भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़त

भारत की उभरती वैश्विक ताकत: लोकतंत्र, युवा जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स का अनोखा संगम


गोंदिया (महाराष्ट्र)। भारत आज वैश्विक मंच पर केवल एक देश नहीं, बल्कि स्थिरता, अवसर और विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। 21वीं सदी में भारत की बढ़ती ताकत को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उसके मजबूत लोकतंत्र, युवा जनसंख्या और कुशल कार्यबल के समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी के अनुसार, भारत की यही तीन प्रमुख शक्तियाँ—लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स—उसे विश्व के लिए “विन-विन साझेदार” बनाती हैं।
भारत का लोकतंत्र इसकी सबसे बड़ी ताकत है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद से देश ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती से अपनाया है। नियमित चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शी शासन व्यवस्था ने देश को राजनीतिक स्थिरता प्रदान की है। विविधताओं से भरे इस देश में एकता और लोकतांत्रिक सहभागिता का मॉडल विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। यही कारण है कि वैश्विक कंपनियाँ भारत को निवेश के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बाजार मानती हैं।
दूसरी महत्वपूर्ण शक्ति भारत की जनसांख्यिकी है। लगभग 1.43 अरब की आबादी में 65 प्रतिशत से अधिक युवा वर्ग शामिल है। यह युवा शक्ति नवाचार, तकनीकी अपनाने और उद्यमिता में अग्रणी है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तेजी से उभर रहा है, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल रही है।
तीसरी और निर्णायक शक्ति है भारत का स्किल्ड वर्कफोर्स। आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर वैश्विक तकनीकी केंद्र बन चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका ने विश्व स्तर पर उनकी दक्षता को साबित किया।

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जब वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश करती हैं, तो उन्हें एक साथ तीन प्रमुख लाभ मिलते हैं—स्थिर राजनीतिक माहौल, विशाल उपभोक्ता बाजार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन। यही कारण है कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को भविष्य का प्रमुख निवेश केंद्र मान रही हैं।
हालांकि, चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। शिक्षा और कौशल में असमानता, आधारभूत संरचना की कमी और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ अभी भी सामने हैं। लेकिन सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के माध्यम से इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्षतः, भारत का विकास मॉडल केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए अवसरों का द्वार खोलता है। लोकतंत्र, युवा ऊर्जा और कुशल कार्यबल का यह संगम आने वाले समय में भारत को एक मजबूत वैश्विक शक्ति और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करेगा।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

Editor CP pandey

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