India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता बनेगा गेम चेंजर, जानें क्या हैं बड़ी चुनौतियां

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और निवेश संरक्षण समझौता आने वाले समय में व्यापारिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है।
भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हेर्वे डेल्फिन ने कहा कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए “गेम चेंजर” साबित होगा, खासकर तब जब दुनिया के कई देश अपने बाजारों को सीमित कर रहे हैं या आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ा रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच 14वें चरण की वार्ता जल्द ही ब्रसेल्स में होने जा रही है।
पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को दिसंबर तक पूरा करने का संकल्प दोहराया था।

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

राजदूत डेल्फिन ने बताया कि यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के उद्योगों और निवेशकों के लिए नए अवसर खोलेगा और व्यापार को विविधता और स्थिरता प्रदान करेगा।

डेल्फिन के अनुसार, जब कई देश अपने बाजार बंद कर रहे हैं, ऐसे में भारत-ईयू FTA न केवल व्यापार को नए आयाम देगा बल्कि सप्लाई चेन को मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से बचाव में भी मदद करेगा।

बातचीत में अब भी कई चुनौतियां बाकी

हालांकि, डेल्फिन ने स्वीकार किया कि समझौते की बातचीत चुनौतीपूर्ण है और अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे हैं।
सितंबर में दिल्ली में हुई 13वीं दौर की वार्ता में यूरोपीय आयोग के उच्च प्रतिनिधि शामिल हुए थे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।

अब तक 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है, जिनमें शामिल हैं:

कस्टम्स (Customs)

विवाद समाधान (Dispute Settlement)

डिजिटल ट्रेड

सतत खाद्य प्रणाली (Sustainable Food Systems)

एमएसएमई (MSME Cooperation)

प्रतिस्पर्धा (Competition)

सब्सिडी और पूंजी प्रवाह (Subsidies & Capital Movement)

लेकिन रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin) और मार्केट एक्सेस (Market Access) जैसे अहम विषयों पर अभी भी बातचीत जारी है।

भारत-ईयू FTA से बदल सकता है आर्थिक परिदृश्य

डेल्फिन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक (Complementary) हैं।
दोनों के बीच व्यापार और निवेश में तेज वृद्धि की अपार संभावना है।
उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो यह न केवल भारत-ईयू संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भी भारत की भूमिका को मजबूत करेगा।

उन्होंने जोड़ा कि भारत और यूरोपीय संघ विश्व की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं — ऐसे में यह FTA वैश्विक व्यापार संतुलन में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

Karan Pandey

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