खिरिया बाग की महिलाओं ने पेड़ों पर बांधी राखियाँ
आजमगढ़ ( राष्ट्र की परम्परा )
ग्यारह महीने से एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के नाम पर जमीन छीने जाने के विरोध में संघर्षरत महिलाओं ने गावों के पेड़ों पर राखी बांधकर संकल्प लिया कि जमीन नहीं देंगे।
रक्षाबंधन के त्योहार को खिरिया बाग की महिलाओं ने पेड़ों पर राखी बांधकर मनाया, किस्मती, बिंदु, सुनीता और नीलम ने कहा कि ये पेड़ पौधे हमारे भाई बंधु हैं. आज जब देश रक्षाबंधन का त्योहार मना रहा है तब हमने पेड़ों को राखी बांधकर यह संदेश दिया कि पुरखों की जमीन पर लगे इन पेड़ों से हमारा सदियों का रिश्ता है, ये जमीन नहीं हमारी माता है। सरकार हर साल वृक्षारोपण के लिए करोड़ों रुपए खर्च करती है और उसके विपरीत जाकर विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं, आक्सीजन जीवन का आधार है, पेड़ के बगैर जीवन संभव नहीं। सरकार को यह समझना चाहिए की हवा, पानी, अनाज किसी फैक्ट्री में नहीं पैदा किए जा सकते।
किसान नेता राजीव यादव ने कहा कि आजमगढ़ में पिछले ग्यारह महीने से चल रहा किसान आंदोलन जमीन मकान बचाने के साथ ही पर्यावरण और खाद्य संकट जैसे मुद्दों की सशक्त आवाज बन गया है, चिपको आंदोलन जैसे आंदोलनों से प्रेरणा लेकर महिलाओं ने पेड़ों पर राखी बांधकर यह संदेश दिया कि इस धरती पर जीवन के अस्तित्व का सवाल है।
राजेश सरोज की अध्यक्षता में सुनीता, किस्मती, नीलम, बिंदु यादव, राधिका, सुदामी, निर्मला, बादामी, मीना, पुष्पा, श्याम दुलारी, चंद्रावती, धनपत्ति, चंद्रमा, सुभागी, शकुंतला, ऊषा, रीता, मानवता, गुलैची समेत सैकड़ों महिलाओं ने पेड़ों पर राखी बांधी. इस दौरान किसान नेता राजीव यादव, अवधेश यादव, प्रेम चंद, शशिकांत उपाध्याय, महेंद्र राय, नंदलाल यादव, बलराम यादव, सुजय उपाध्याय, राम चंद्र यादव, संदीप यादव, महातम यादव, लालसा यादव, कमलेश, जटाशंकर आदि मौजूद रहे।
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