इतिहास के पन्नों में दर्ज महान व्यक्तियों के महत्वपूर्ण निधन

18 जनवरी के निधन

हरिवंश राय बच्चन (2003)
हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के स्तंभ माने जाते हैं। उनका जन्म 1907 में प्रयागराज में हुआ। ‘मधुशाला’ ने उन्हें जन-जन का कवि बनाया और हिंदी कविता को नई लोकप्रियता दी। उनकी रचनाओं में जीवन, दर्शन, प्रेम और सामाजिक यथार्थ का गहरा समन्वय दिखाई देता है। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापक रहे और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। 18 जनवरी 2003 को उनका निधन हुआ, जिससे हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई।

ये भी पढ़ें – छाता गांव में मंदिर में बड़ी चोरी, ताले तोड़कर मां दुर्गा के गहने और दानपात्र ले गए चोर

एन. टी. रामाराव (1996)
नंदमुरी तारक रामाराव दक्षिण भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे। उन्होंने पौराणिक फिल्मों में भगवान कृष्ण और राम जैसे पात्रों को अमर बना दिया। 1982 में उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की और क्षेत्रीय अस्मिता को राष्ट्रीय राजनीति में नई पहचान दी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गरीबों के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। 18 जनवरी 1996 को उनके निधन से सिनेमा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में शून्य पैदा हो गया।
सआदत हसन मंटो (1955)
सआदत हसन मंटो उर्दू साहित्य के सबसे बेबाक और यथार्थवादी कहानीकारों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 1912 में हुआ था। ‘टोबा टेक सिंह’, ‘ठंडा गोश्त’ और ‘खोल दो’ जैसी कहानियों ने विभाजन की त्रासदी और मानव मन की जटिलताओं को निर्भीकता से उजागर किया। उन पर कई बार अश्लीलता के मुकदमे चले, लेकिन वे सच लिखने से कभी पीछे नहीं हटे। 18 जनवरी 1955 को उनका निधन हुआ, पर उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं।

ये भी पढ़ें – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर का विधायक ने किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं को लेकर दिए सख्त निर्देश

कुंदन लाल सहगल (1947)
कुंदन लाल सहगल भारतीय सिनेमा और संगीत के शुरुआती दौर के महान गायक-अभिनेता थे। उनका जन्म 1904 में जम्मू में हुआ। ‘देवदास’ और ‘तानसेन’ जैसी फिल्मों में उनके गीतों ने अमरता पाई। उनकी भावपूर्ण आवाज़ ने फिल्मी संगीत की दिशा तय की और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने शास्त्रीय और लोक संगीत को लोकप्रिय सिनेमा से जोड़ा। 18 जनवरी 1947 को जालंधर में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी गायकी आज भी जीवित है।
रुडयार्ड किपलिंग (1936)
रुडयार्ड किपलिंग ब्रिटिश लेखक और कवि थे, जिन्हें 1907 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनका जन्म भारत में हुआ और भारतीय जीवन का प्रभाव उनकी रचनाओं में स्पष्ट दिखता है। ‘द जंगल बुक’ और ‘किम’ उनकी प्रसिद्ध कृतियां हैं। उनकी लेखनी में साहस, साम्राज्यवाद और मानवीय संघर्ष के विषय प्रमुख रहे। अंग्रेजी साहित्य में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 18 जनवरी 1936 को उनके निधन से विश्व साहित्य ने एक बड़ा लेखक खो दिया।
भीम सेन सच्चर (1978)
भीम सेन सच्चर भारत के स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ राजनीतिज्ञ थे। वे पंजाब और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासनिक क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सादगी का उदाहरण प्रस्तुत किया। 18 जनवरी 1978 को उनका निधन हुआ।
ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफ़िर (1976)
ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफ़िर पंजाबी साहित्य के प्रमुख कवि और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे पंजाब के मुख्यमंत्री भी रहे। उनकी रचनाओं में देशभक्ति, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाएं प्रमुख हैं। उन्होंने साहित्य और राजनीति दोनों क्षेत्रों में संतुलित योगदान दिया। पंजाबी भाषा को समृद्ध करने में उनका विशेष स्थान है। 18 जनवरी 1976 को उनका निधन हुआ।

ये भी पढ़ें – सोम मुंडा हत्या कांड के विरोध में झारखंड बंद, रांची की सड़कों पर उतरे आदिवासी संगठन

बद्रीनाथ प्रसाद (1966)
बद्रीनाथ प्रसाद भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ थे। उन्होंने गणित के जटिल सिद्धांतों को सरल रूप में प्रस्तुत किया और शैक्षणिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शोध और शिक्षण कार्य ने अनेक छात्रों को प्रेरित किया। भारतीय गणित परंपरा को आधुनिक स्वरूप देने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। 18 जनवरी 1966 को उनका निधन हुआ।
लक्ष्मी नारायण साहू (1963)
लक्ष्मी नारायण साहू उड़ीसा के समाजसेवी और सार्वजनिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने सामाजिक सुधार, शिक्षा और जनकल्याण के लिए जीवन समर्पित किया। ग्रामीण विकास और जनजागरण में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे सादगी और सेवा भावना के प्रतीक माने जाते थे। 18 जनवरी 1963 को उनका निधन हुआ।
दुलारी (2013)
दुलारी भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री थीं। उन्होंने 1940–50 के दशक में कई लोकप्रिय फिल्मों में अभिनय किया। उनके अभिनय में सहजता और भावनात्मक गहराई देखने को मिलती थी। वे सहायक और चरित्र भूमिकाओं में विशेष रूप से सराही गईं। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का वे अहम हिस्सा रहीं। 18 जनवरी 2013 को उनके निधन से फिल्म जगत ने एक अनुभवी कलाकार खो दी।

Editor CP pandey

Recent Posts

स्वरोजगार योजनाओं में तेजी लाने और निवेश बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस

डीएम ने बैंकों और विभागों को समयबद्ध लक्ष्य पूरा करने के दिए निर्देश, जीबीसी 5.0…

8 hours ago

माय भारत पोर्टल से जोड़ने के लिए डीएम ने सभी विभागों को दिए निर्देश, उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को मिलेगा सम्मान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में…

8 hours ago

45वें दीक्षांत समारोह से पहले गांवों में प्रतिभा का उत्सव, ‘मेरी मां’ विषय पर विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह के तहत गोद…

8 hours ago

कस्बा चौकी सिकंदरपुर में जीर्णोद्धारित कार्यालय एवं नई बैरक का लोकार्पण

सिकंदरपुर /बलिया (राष्ट्र की परम्परा) कस्बा चौकी सिकंदरपुर परिसर में शुक्रवार को जीर्णोद्धारित कार्यालय तथा…

8 hours ago

घर के बाहर सो रही महिला की धारदार हथियार से हत्या, गांव में सनसनी

रात में हुए विवाद के बाद वारदात की आशंका,फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, आरोपितों की…

8 hours ago

30 जुलाई तक करें पंजीकरण, बीबीएयू ने जारी किया स्नातक प्रवेश काउंसलिंग कार्यक्रम

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के स्नातक…

8 hours ago