IAS तबादला सूची 2025: विजयलक्ष्मी एन से लेकर संजीव हंस तक, कौन कहां तैनात

बिहार प्रशासन में बड़ा फेरबदल: 10 IAS अधिकारियों के तबादले, संजीव हंस की नई तैनाती पर सियासी हलचल

पटना (राष्ट्र की परम्परा डैस्क)बिहार सरकार ने वर्ष 2025 के अंत में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल को अंजाम देते हुए 10 IAS अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कई अहम विभागों और प्रमंडलों में बदलाव किया गया है, लेकिन इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा संजीव हंस को नई जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर हो रही है। सामूहिक दुष्कर्म मामले में बरी होने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण वे पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं।सरकार के आदेश के अनुसार, 1995 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी विजयलक्ष्मी एन को योजना एवं विकास विभाग का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे पशुपालन विभाग में इसी पद पर कार्यरत थीं। इसके साथ ही उन्हें बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। प्रशासनिक गलियारों में यह नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विजयलक्ष्मी, वरिष्ठ IAS अधिकारी डॉ. एस. सिद्धार्थ की पत्नी हैं।वहीं, 2011 बैच के IAS अधिकारी सेंथिल कुमार को गन्ना उद्योग विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। इससे पहले वे योजना एवं विकास विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात थे। 1997 बैच के पंकज कुमार को ग्रामीण विकास विभाग का नया प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि वे अब तक कृषि विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।इस तबादला सूची में चार प्रमंडलों के आयुक्त भी बदले गए हैं।प्रेम सिंह मीणा (2000 बैच) को मुंगेर प्रमंडल का आयुक्त बनाया गया है।मनीष कुमार (2005 बैच) को सारण प्रमंडल का आयुक्त नियुक्त किया गया है।गिरिवर दयाल सिंह (2008 बैच) को तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर का आयुक्त बनाया गया है।अवनीश कुमार सिंह (2010 बैच) को भागलपुर प्रमंडल का नया कमिश्नर बनाया गया है।इसके अलावा सरकार ने चार IAS अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं, जिनमें नगर विकास, बिजली वितरण, स्वास्थ्य और खेल विभाग से जुड़े अहम दायित्व शामिल हैं।हालांकि, इस पूरी सूची में सबसे ज्यादा सुर्खियां संजीव हंस को मिली नई जिम्मेदारी ने बटोरी हैं। आय से अधिक संपत्ति और ब्लैक मनी से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) सहित कई एजेंसियां अब भी जांच कर रही हैं। चार शहरों में 20 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी और अन्य IAS अधिकारियों से कथित लेन-देन के संकेतों ने इस तबादले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना दिया है।स्पष्ट है कि बिहार IAS तबादला 2025 केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और नौकरशाही की दिशा तय करने वाला कदम साबित हो सकता है।

rkpnews@desk

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