अग्निकांड की भयावह कहानी: बेटियों की लाश से लिपटकर रोता रहा पिता

मेरठ अग्निकांड: लिसाड़ी गेट के किदवई नगर में 6 की दर्दनाक मौत, बाले मियां कब्रिस्तान में नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अग्निकांड ने पूरे शहर को गहरे सदमे में डाल दिया है। Meerut के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के किदवई नगर में हुए भीषण आग हादसे में पांच मासूम बच्चों और एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। मंगलवार को जब शवों को बाले मियां कब्रिस्तान ले जाया गया तो हर आंख नम थी और हर चेहरा गमगीन।
एक साथ उठे चार जनाजे, गूंज उठा कब्रिस्तान
मंगलवार दोपहर बाले मियां कब्रिस्तान में जब एक साथ चार जनाजे पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों की सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं। जनाजे की नमाज के बाद सभी शवों को नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले 6 माह की दो जुड़वां मासूम बहनों को परिजनों ने सोमवार देर रात ही दफना दिया था।
मेरठ अग्निकांड की खबर जैसे ही फैली, किदवई नगर और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम विदाई के दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। हर कोई इस असहनीय दुख में परिवार के साथ खड़ा नजर आया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, लिसाड़ी गेट के किदवई नगर स्थित कपड़ा कारोबारी इकबाल के मकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि घर के अंदर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है।
मेरठ अग्निकांड ने एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में फायर सेफ्टी और जर्जर बिजली तारों की समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बिजली के तार काफी पुराने हैं और कई बार शिकायत के बावजूद सुधार नहीं हुआ।
आसिम का उजड़ गया पूरा संसार
इस दर्दनाक हादसे में इकबाल के बेटे आसिम का पूरा परिवार खत्म हो गया। उनकी पत्नी, एक बेटा और दो जुड़वां बेटियां आग की चपेट में आ गईं। अस्पताल पहुंचे आसिम बदहवास हालत में बच्चों और पत्नी के बारे में पूछते रहे।
जब उन्हें पत्नी और बच्चों की मौत की सूचना मिली तो वह टूट गए। दोनों जुड़वां बेटियों की लाश से लिपटकर आसिम फूट-फूटकर रोते रहे। यह दृश्य देखकर मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
मेरठ अग्निकांड की यह तस्वीर शहर की यादों में लंबे समय तक दर्ज रहेगी।
इलाके में पसरा मातम और सन्नाटा
किदवई नगर की गलियां, जहां कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, अब सन्नाटे में डूबी हैं। हर घर में बस इसी हादसे की चर्चा है।
घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं और शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच
जिलाधिकारी ने बताया कि आग लगने के कारणों की गहन जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सके।
यदि शॉर्ट सर्किट की पुष्टि होती है तो यह सवाल उठेगा कि क्या समय रहते बिजली व्यवस्था की मरम्मत की गई थी या नहीं।
मेरठ अग्निकांड के बाद प्रशासन ने शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के संकेत दिए हैं।
फायर सेफ्टी पर उठे सवाल
यह हादसा सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। विशेषज्ञों के अनुसार:
पुराने और जर्जर बिजली तार बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
घनी बस्तियों में फायर सेफ्टी उपकरणों की भारी कमी है।
संकरी गलियों में दमकल की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पातीं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इलाके में बिजली लाइनों की जांच और सुधार तुरंत किया जाए।
सामाजिक एकजुटता का उदाहरण
मेरठ अग्निकांड के बाद स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। कई सामाजिक संगठनों ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
जनाजे के दौरान जिस तरह लोग एकजुट होकर पहुंचे, वह सामाजिक भाईचारे की मिसाल भी बना।
मेरठ अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है कि फायर सेफ्टी और बिजली व्यवस्था को लेकर लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
छह जिंदगियों की कीमत पर मिला यह सबक प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर सोच का विषय है। अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

Editor CP pandey

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