हिंदी हमारी प्यारी मातृभाषा है,
देवभाषा संस्कृत की बेटी यह
संस्कृत भाषा की सहभाषा है,
भारतीय बड़े भाग की भाषा है।
हिंदी मेरे तन में, हिंदी मेरे मन में है,
हिंदी मेरी आत्मा में है, प्रकृति में है,
भारतीय भाषाओं की सहोदरा है,
भारत की राष्ट्र भाषा यह हिंदी है।
हिन्दी मैंने माँ से पिता से सीखा है,
मेरे परिवार की भाषा मेरी हिन्दी है,
मेरी मातृभाषा हिंदी सबसे प्यारी है,
विश्व की सब भाषाओं से न्यारी है।
हिंदी की देवनागरी लिपि सरल है,
लिखने में सुरुचिपूर्ण व आसान है,
आदित्य हिंदी जन जन की भाषा है,
यह चिर परिचित अविनाशी भाषा है।
डॉ. कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
