विश्व मानवाधिकार दिवस पर पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट ने कराई गोष्ठी
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर नदी विस्थापित परिवारों के साथ चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि परिवार स्तर पर मानवाधिकार का सर्वाधिक हनन लड़का लड़की में विकास के अवसरों की कमी कर किया जाता है, इसी प्रकार परिवार स्तर पर बुज़ुर्ग महिला व पुरुष सदस्यों के सम्मान व जीवन जीने की मूलभूत सुविधाओं को नजरंदाज होता है जिसे हम लोग संज्ञान में नहीं लेते और उसे महसूस भी नहीं करते जबकि हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार है।
यह बात पंचशील डेवलेपमेंट ट्रस्ट के निदेशक ध्रुव कुमार ने कही और उन्होंने कहा की घाघरा नदी स्थापित परिवारों में रोजी-रोटी का आधार समाप्त हो जाने के बाद एक बेहतर आजीविका विकल्प के साथ परिवार में बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के आधार को मजबूत करना हमारा मुख्य पहल है जिससे महिलाओं , पुरुषों और बच्चों में एक सम्मान व गरिमा का वातावरण तैयार हो सके और एक समझदार व्यक्तित्व वाले मानव संसाधन तैयार हों।
अपने घर व समाज के बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों के अधिकार को सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी घर के मुख्य सदस्य व गांव के मुखिया प्रथम उत्तरदायी होते है,जोगापुरवा के लक्ष्मण ने बच्चों की समझदारी विकसित करने के लिए बच्चों के साथ हर 15 दिन पर प्रेरणादायी चर्चा आयोजित करने की आवश्यकता बताई।
रविवार को मानव अधिकार दिवस के अवसर पर जोगापुरवा बौंडी में आयोजित इस कार्यक्रम में 50 से अधिक नेतृत्वकर्ता महिलाओं व पुरुषों ने भाग लिया जो भविष्य में एक नई आदर्श व्यवस्था स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने के लिए सतर्क होंगे जिससे परिवार व गांव स्तर पर मानवाधिकार हनन की घटनाएं न हों,इस कार्यक्रम के आयोजन में पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट के कार्यदल सदस्यों के साथ गांव के लोगों का सहयोग सराहनीय रहा।
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