हरतालिका तीज : आस्था, परंपरा और सोलह श्रृंगार का महत्व

पर्व विशेष

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। पवित्र सावन मास के बाद भादो मास में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत-त्यौहारों में हरतालिका तीज का विशेष स्थान है। यह पर्व मंगलवार को मनाया जा रहा है। हरतालिका तीज को विवाहित महिलाओं का पर्व कहा जाता है। इस दिन महिलाएँ व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं तथा अपने पति के दीर्घायु, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने इसी दिन कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए पवित्र और मंगलकारी माना जाता है। इस दिन प्रातः स्नान-ध्यान के उपरांत महिलाएँ व्रत का संकल्प लेकर श्रृंगार करती हैं और दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। संध्या समय भगवान शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
हरतालिका तीज पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। यह श्रृंगार केवल सौंदर्य बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और वैवाहिक जीवन की स्थिरता के प्रतीक माने जाते हैं। सोलह श्रृंगार में बिंदी, सिंदूर, काजल, मेहंदी, मंगलसूत्र, चूड़ी, नथ, पायल, बाजूबंद, गजरा, अलता, अंगूठी, कमरबंद, बालों का श्रृंगार, इत्र तथा परिधान-आभूषण सम्मिलित होते हैं। इन सभी का अपना-अपना महत्व है। बिंदी सौभाग्य और एकाग्रता का प्रतीक है, सिंदूर पति की लंबी आयु और दांपत्य स्थिरता का द्योतक है, काजल आँखों की शोभा और बुरी नजर से रक्षा करता है। मेहंदी शुभता और सौंदर्य के साथ शरीर में ठंडक प्रदान करती है। मंगलसूत्र अटूट वैवाहिक संबंध का प्रतीक है। चूड़ियाँ सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। नथ और पायल स्त्री-सौंदर्य और स्वास्थ्य से जुड़े माने जाते हैं। बाजूबंद शक्ति का द्योतक है, गजरा और फूल शीतलता व सुगंध का प्रसार करते हैं। अलता पैरों की शोभा और शुभता बढ़ाता है। अंगूठी वैवाहिक बंधन का प्रतीक है, कमरबंद आभूषण के साथ शारीरिक संतुलन को दर्शाता है। बालों का श्रृंगार रूप को पूर्णता देता है, वहीं इत्र और सुगंध ताजगी और आकर्षण का प्रतीक माने जाते हैं। परिधान और आभूषण सम्पूर्ण श्रृंगार को पूर्णता प्रदान करते हैं और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
सोलह श्रृंगार का संबंध केवल परंपरा से नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। मेहंदी शरीर को ठंडक पहुँचाती है, पायल और बिछुए रक्त संचार को संतुलित करते हैं, गजरा मानसिक शांति देता है, वहीं इत्र और फूल ताजगी प्रदान करते हैं। इस प्रकार श्रृंगार का उद्देश्य स्वास्थ्य, सौंदर्य और मानसिक संतुलन से भी जुड़ा है।
हरतालिका तीज केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर महिलाएँ एकत्र होकर गीत-संगीत और पूजा-अर्चना करती हैं। इससे आपसी मेल-जोल बढ़ता है और सामाजिक एकता मजबूत होती है। परिवार और दांपत्य जीवन में प्रेम तथा विश्वास की भावना सुदृढ़ होती है।
हरतालिका तीज भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यह पर्व नारी-शक्ति, आस्था और दांपत्य सुख का प्रतीक है। सोलह श्रृंगार की परंपरा स्त्री के सौंदर्य को ही नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और मानसिक शांति को भी बढ़ाती है। यही कारण है कि यह पर्व आज भी महिलाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय और श्रद्धा से मनाया जाता है।

rkpnews@desk

Recent Posts

Lucknow BKT Bulldozer Action: अवैध मस्जिद पर चला बुलडोजर, हाई कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) क्षेत्र…

2 hours ago

Ramayana Teaser Out: रणबीर कपूर बने भगवान राम, भव्य टीजर ने जीता फैंस का दिल

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। महीनों के इंतज़ार के बाद फिल्म रामायण का टीजर हनुमान जयंती…

2 hours ago

Supreme Court on Bengal Violence: जजों पर हमले से नाराज सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश

नई दिल्ली/कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव…

2 hours ago

IPL 2026 Points Table: दिल्ली कैपिटल्स ने MI और PBKS को पछाड़ा, जानें कौन किस स्थान पर

IPL 2026 के मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से…

4 hours ago

Maharajganj News: अपराध गोष्ठी में एसपी सख्त, कानून-व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक…

4 hours ago

Deoria News: बरहज में महिला अध्यक्षों की क्षमता संवर्धन कार्यशाला, नेतृत्व और सुशासन पर जोर

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर विकास विभाग के नॉलेज पार्टनर जनाग्रह के सहयोग से नगरीय…

5 hours ago