नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क4)अमेरिका में स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए एच-1बी वीजा अब महंगा और चुनौतीपूर्ण बन गया है। ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा शुल्क को बढ़ाकर $1 लाख (करीब 88 लाख रुपए) कर दिया है और चयन प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव किए हैं। अब वीजा सिर्फ लॉटरी से नहीं बल्कि उम्मीदवार के कौशल और वेतन स्तर पर निर्भर करेगा। इस बदलाव से भारतीय आईटी और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथेमैटिक्स) क्षेत्र के प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में अवसर सीमित हो सकते हैं।
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इसी बीच चीन ने 1 अक्टूबर से ‘के वीजा’ लॉन्च किया है, जो वैश्विक प्रतिभाओं के लिए नई संभावना खोलता है। इस वीजा के तहत प्रोफेशनल्स को किसी स्थानीय नियोक्ता के जॉब ऑफर की जरूरत नहीं होगी और वे सीधे रिसर्च, शिक्षा, स्टार्टअप और बिजनेस गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। 10 साल तक मल्टीपल एंट्री की सुविधा, युवा वैज्ञानिकों और तकनीकी पेशेवरों के लिए वरीयता, और STEM क्षेत्रों में विशेष अवसर इसे अमेरिकी एच-1बी वीजा से अलग और आकर्षक बनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के वीजा शुल्क और सख्त नियमों के कारण भारत के एंट्री और मिड-लेवल प्रोफेशनल्स अब चीन और अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां उनके लिए बेहतर अवसर और खुली संभावनाएं मौजूद हैं।
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