आध्यात्मिक चेतना से राष्ट्र निर्माण की ओर अग्रसर गायत्री यज्ञ

गायत्री यज्ञ: राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जब समाज दिशाहीनता, नैतिक पतन और केवल भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में उलझ जाता है, तब आत्मचिंतन और चेतना के जागरण की आवश्यकता सबसे अधिक महसूस होती है। गायत्री यज्ञ इसी आत्म जागरण और राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का प्रभावशाली माध्यम है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विचारों की शुद्धि, जीवन के परिष्कार और समाज के उत्थान की संगठित प्रक्रिया है।
ॐ भूर्भुवः स्वः का उच्चारण मात्र मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि मानव चेतना को ऊर्ध्वगामी करने का आह्वान है। गायत्री यज्ञ की अग्नि में आहुति देते समय साधक केवल समिधा नहीं अर्पित करता, वह अपने अहंकार, अवगुण और नकारात्मक प्रवृत्तियों का भी त्याग करता है। यही त्याग उसे सामाजिक, नैतिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्वों की ओर अग्रसर करता है।

ये भी पढ़ें – यह बजट योगी सरकार की विदाई का बजट: सुभाष चंद्र

आज का समाज नशा, प्रदूषण, पारिवारिक विघटन, बेरोजगारी और संस्कारहीनता जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गायत्री यज्ञ सात सूत्रीय संकल्प के माध्यम से आत्मबोध, संस्कारयुक्त शिक्षा, नारी सम्मान, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का स्पष्ट संदेश देता है। यही कारण है कि गायत्री यज्ञ को सामाजिक क्रांति का सूत्रधार माना जाता है, जो व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करता है।

ये भी पढ़ें – सुष्मिता सिंह बक्की रच रहीं विज्ञान और वेदों का संगम, 13,500 किमी दूर नासा पहुंचेगी पेंटिंग

यज्ञ की अग्नि यह स्मरण कराती है कि प्रकाश फैलाने के लिए स्वयं जलना पड़ता है। राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। जब व्यक्ति अपने भीतर की दुर्बलताओं को त्यागकर समाजहित में स्वयं को समर्पित करता है, तभी एक सशक्त, संस्कारवान और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। गायत्री यज्ञ इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।

ये भी पढ़ें – घटिया निर्माण पर रुका धार्मिक पोखरे का सुंदरीकरण, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पूरी

गायत्री यज्ञ का वास्तविक अर्थ है—विचारों की शुद्धि, चरित्र का निर्माण और समाज का उत्थान। यदि हम इसे केवल एक परंपरागत अनुष्ठान मानने के बजाय इसके संदेशों को अपने दैनिक जीवन में उतारें, तो यही आयोजन राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का आंदोलन बन सकता है। आज आवश्यकता है कि यज्ञ की लौ हमारे भीतर भी प्रज्वलित हो—संस्कारों की, सद्भाव की और सामाजिक जिम्मेदारी की। तभी यह महायज्ञ अपने वास्तविक उद्देश्य में सफल होगा।

Editor CP pandey

Recent Posts

मवेशी खाना की भूमि पर अतिक्रमण: क्या प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी?

पैमाइश के दो साल बाद भी मवेशी खाना की जमीन खाली क्यों नहीं? प्रशासनिक चुप्पी…

8 minutes ago

अंधविश्वास के जाल में फंसी महिला, आभूषण दुकान में चोरी की नाकाम कोशिश

नकली चेन से असली सोना बदलने की कोशिश, दुकानदार की समझदारी से खुलासा सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र…

17 minutes ago

वीआईपी रोड पर 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी से मचा हड़कंप, शिवम मिश्रा पुलिस हिरासत में

कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा: वीआईपी रोड दुर्घटना में शिवम मिश्रा गिरफ्तार, ड्राइवर बदलने का दावा पुलिस…

34 minutes ago

ऊर्जा नीति और आयात शुल्क पर विपक्ष बनाम सरकार की सीधी टक्कर

लोकसभा में राहुल गांधी पर बड़ा राजनीतिक हमला: निशिकांत दुबे ने पेश किया प्रस्ताव, सदस्यता…

46 minutes ago

डांट से नाराज़ भाई ने पार की हैवानियत की हद

डांट से नाराज़ छोटे भाई की खौफनाक साजिश, बड़े भाई को कमरे में बंद कर…

53 minutes ago

किसानों और व्यापारियों के लिए जीवनरेखा बनी मझवारा सब्जी मंडी वर्षों से बंद

मऊ में जर्जर सड़कें, बंद सब्जी मंडी और मझवारा चौकी को थाना बनाने की उठी…

1 hour ago