मऊ,(राष्ट्र की परम्परा)। गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत जनपद मऊ में पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता को लेकर एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। जिला गंगा समिति मऊ द्वारा रामवचन सिंह महिला महाविद्यालय, बगली पिजड़ा में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और श्रमदान करते हुए लगभग 80 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र कर स्वच्छता का संदेश दिया।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य न केवल गंगा सहित अन्य नदियों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना था, बल्कि युवाओं को जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रेरित करना भी रहा। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों, प्रतियोगिताओं और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से नदी संरक्षण का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
श्रमदान से स्वच्छता का संदेश, तालाब का हुआ पुनरोद्धार
कार्यक्रम के तहत महाविद्यालय परिसर में स्थित वर्षा जल संचयन के लिए बनाए गए तालाब की सफाई और पुनरोद्धार का कार्य किया गया। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक श्रमदान करते हुए तालाब में फैली गंदगी को हटाया और उसे स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस दौरान लगभग 80 किलो प्लास्टिक कचरे को एकत्र किया गया, जो यह दर्शाता है कि यदि सामूहिक प्रयास किए जाएं, तो पर्यावरण को स्वच्छ रखना संभव है। यह पहल स्थानीय स्तर पर जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित हुई।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रमेश कुमार और जिला परियोजना अधिकारी डॉ. हेमंत यादव द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
इस अवसर पर दोनों अधिकारियों ने गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नदियां हमारे जीवन का आधार हैं और उनकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
लोकगीतों के माध्यम से जागरूकता
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण गंगा लोकगीत आधारित जागरूकता प्रस्तुति रही। लोकगायिका मंजू चौहान ने अपने मधुर गीतों के माध्यम से गंगा सहित अन्य नदियों के संरक्षण का संदेश दिया। उनके गीतों ने उपस्थित छात्राओं और दर्शकों को भावुक कर दिया और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराया।
इसके अलावा महाविद्यालय की छात्राओं—अर्चना सिंह चौहान, आकांक्षा चौहान, मीनाक्षी द्विवेदी और स्नेहा कनौजिया—ने भी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसमें नदियों की पवित्रता और उनके महत्व को उजागर किया गया।
प्रतियोगिताओं के जरिए जागरूकता का विस्तार
कार्यक्रम के अंतर्गत लोकगीत और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ और नदी स्वच्छता जैसे विषयों पर आकर्षक पोस्टर बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
पूनम चौहान, काजल वर्मा सहित कई छात्राओं ने अपने चित्रों के माध्यम से यह संदेश दिया कि यदि आज हम नदियों को बचाने के लिए कदम नहीं उठाएंगे, तो भविष्य में जल संकट गंभीर रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों का संदेश: नदियों की स्वच्छता है सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों और अधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए। डॉ. पवन कुमार सिंह, डॉ. दीपक पाराशर और डॉ. शिवनाथ प्रसाद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रविंद्र कुमार पांडे द्वारा किया गया, जिन्होंने विभिन्न गतिविधियों को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया।
शपथ के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. रमेश कुमार ने कविता के माध्यम से नदी संरक्षण का संदेश दिया, जिसने सभी को प्रेरित किया। वहीं, जिला परियोजना अधिकारी डॉ. हेमंत यादव ने सभी उपस्थित लोगों को गंगा स्वच्छता की शपथ दिलाई।
उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी यह संकल्प लें कि न केवल गंगा, बल्कि देश की सभी नदियों की स्वच्छता और अविरलता बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल
गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के तहत आयोजित यह कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो न केवल नदियों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि समाज में स्वच्छता के प्रति एक स्थायी संस्कृति विकसित होगी।
निष्कर्ष
मऊ में आयोजित गंगा स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव संभव हैं। छात्राओं द्वारा किया गया श्रमदान और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से दिया गया संदेश समाज के लिए एक प्रेरणा है।
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