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प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू: विज्ञान, आधुनिकता और प्रगति के पथप्रदर्शक

पुनीत मिश्र

भारत के इतिहास में 14 नवम्बर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की नींव रखने वाले प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की स्मृति का गौरवपूर्ण दिवस है। राष्ट्र उन्हें केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी विचारक के रूप में याद करता है जिसने स्वतंत्र भारत को वैज्ञानिक सोच, प्रगतिशील नीतियों और आधुनिक दृष्टिकोण की दिशा दिखायी।
पंडित नेहरू का जन्म 1889 में इलाहाबाद में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। इंग्लैंड में शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उनका मन मातृभूमि की दासता से व्यथित रहा। महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में कदम रखा और जल्द ही वे कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा, नमक सत्याग्रह और किसानों-मजदूरों के मुद्दों को लेकर उनके संघर्षों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया। कई बार जेल की यातनाओं के बावजूद नेहरू की प्रतिबद्धता अडिग रही।
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने एक नवजात राष्ट्र को संभालने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी उठाई। विभाजन की पीड़ा, आर्थिक संकट, सामाजिक विविधता और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत आधार देने का काम किया। संसद, न्यायपालिका, प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को संरक्षित करने में उनका योगदान अमूल्य रहा।
पंडित नेहरू नेहरू का सबसे बड़ा सपना थाI एक आधुनिक और वैज्ञानिक भारत। उनका विश्वास था कि विज्ञान ही देश को प्रगति की ओर ले जा सकता है। भारी उद्योगों, आईआईटी, डीआरडीओ, वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों की नींव उनके कार्यकाल में रखी गई। भाखड़ा नंगल और दमोड़र घाटी जैसी परियोजनाओं को उन्होंने आधुनिक भारत के ‘मंदिर’ कहा। इन परियोजनाओं ने भारत को न केवल ऊर्जा बल्कि आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नेहरू ने भारत की पहचान को नए स्तर पर स्थापित किया। शीत युद्ध के दौर में उन्होंने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाकर भारत को स्वतंत्र कूटनीतिक दृष्टिकोण दिया। यह नीति आज भी भारत की विदेश नीति का आधार मानी जाती है।
बच्चों के प्रति उनका स्नेह पूरे देश में चर्चित रहा। उनकी सरलता, मधुरता और मासूमियत के प्रति प्रेम के कारण उन्हें ‘चाचा नेहरू’ कहा गया। इसी वजह से उनकी जयंती को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।
आज नेहरू जयंती हमें यह याद दिलाती है कि आधुनिक भारत की मजबूत संरचना किसी एक दिन में नहीं बनी, बल्कि दशकों की सोच, परिश्रम और दूरदृष्टि का परिणाम है। पंडित नेहरू की वैज्ञानिक दृष्टि, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था और प्रगतिशील नीतियां आज भी भारत की विकास यात्रा को प्रेरित करती हैं। उनकी विरासत इतिहास के पन्नों में ही नहीं, बल्कि भारत की हर प्रगति में दिखाई देती है।

rkpNavneet Mishra

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