दीवाली के बाद छठ पर्व की शुरुआत होती है, जो चार दिनों तक चलता है। इस पर्व में व्रती सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में यह पर्व आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाय-खाय’ कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें लौकी की सब्जी और चावल यानी लौकी-भात प्रमुख होता है। यह भोजन छठ व्रत की शुद्ध और पवित्र शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
लौकी हल्की, पचने में आसान और शरीर को ठंडक देने वाली सब्जी है। कार्तिक माह में जब मौसम बदलता है, तब लौकी शरीर के तापमान को संतुलित रखती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। यही कारण है कि इसे छठ व्रत की पहली थाली में शामिल किया जाता है।
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लौकी-भात साधारण लेकिन सात्विक भोजन है, जो सादगी और संयम का संदेश देता है। इसे देशी घी में पकाया जाता है, जिससे ऊर्जा और पवित्रता दोनों बनी रहती हैं। लोक परंपरा के अनुसार, छठी मइया को सात्विकता प्रिय है, इसलिए व्रती इसी भोजन से अपने पर्व की शुरुआत करते हैं।
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