मतदाताओं की चुप्पी से प्रत्याशियों की बढ़ी मुश्किलें
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज में लोकसभा चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में है ऐसे में उम्मीदवार अपने-अपने मतदाताओं को रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे ,लोक लुभावन वादे ,प्रलोभन दे रहे हैं ताकि मतदाता उन्हें वोट करें। बावजूद इसके मतदाता चुप्पी साधे हुए है।इस लोकसभा चुनाव में महराजगंज लोकसभा सीट काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यहां छठी बार के सांसद और भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, चौधरी(कुर्मी) बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं तो वही इंडिया गठबंधन ने कांग्रेस उम्मीदवार वीरेंद्र चौधरी जो कि फरेंदा विधानसभा से वर्तमान में विधायक हैं। कुर्मी (चौधरी )बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं मैदान में ताल ठोक रहे हैं।अब महराजगंज की लड़ाई चौधरी बनाम चौधरी हो गई है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी ने मौसमे आलम को अपना उम्मीदवार बनाकर महराजगंज में उतारा है हालांकि दलित वोटो पर राज करने वाली बहुजन समाज पार्टी मौसमें आलम को अपना प्रत्याशी बनाकर दलित वोटों में बिखराव कर दी हैं।ऐसे में दलित मतदाता मौसमे आलम से मुखर होकर इंडिया गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी के तरफ रुख कर रहे हैं। अब देखना है कि चौधरी बनाम चौधरी की लड़ाई में कौन किस पर भारी पड़ता है हालांकि छठी बार के सांसद पंकज चौधरी को राजनीति की महारथ हासिल है क्योंकि पिछले 30 सालों से महराजगंज की इस लोकसभा सीट पर उनका दबदबा बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि महराजगंज की सीट पर भाजपा के अलावा कोई दूसरा नहीं आ सकता है लेकिन इसी बीच इंडिया गठबंधन ने वीरेंद्र चौधरी पर दाव खेला है।वैसे गठबंधन ने महराजगंज की राजनीति में चौधरी उम्मीदवार उतारकर चौधरी की मुश्किलें और बढ़ा दी है ऐसे में चौधरी पटेल कुर्मी बिरादरियों का वोट जो कि बीजेपी का वोट हुआ करता था वीरेंद्र चौधरी के आने के बाद विखरता नजर आ रहा है। जानकार कयास लगा रहे हैं कि इस बार वीरेंद्र चौधरी की लोगों में काफी चर्चा है। चर्चा होगी क्यों नहीं क्योंकि 30 साल से महराजगंज में बीजेपी के शासनकाल में विकास के मुद्दे एकदम जीरो ऐसे में इंडिया गठबंधन ने वीरेंद्र चौधरी को मैदान में उतार कर सांसद पंकज चौधरी की मुश्किलें काफी बढ़ा दी है।
◆महराजगंज के वोटरों को नहीं लुभा पा रही मोदी मैजिक
इस बार के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं पर मोदी फैक्टर भी नहीं काम कर रहा है अगर राजनीतिक समीकरण की बात करें तो इस लोकसभा क्षेत्र में पिछड़ी और दलित मतदाता का मत निर्णायक हो होता है। जो चुनावी समीकरण को बनाने और बिगाड़ने मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ऐसे में महराजगंज की लोकसभा सीट जो कभी बीजेपी की गढ़ मानी जाती थी इस बार कुछ और ही नजर आ रहा है। अब देखना है कि नरेन्द्र मोदी के नाम का कितना फायदा बीजेपी प्रत्याशी पंकज चौधरी को मिलता है। क्योकि पिछले दो चुनाव में मोदी लहर पर ही यहां के भाजपा प्रत्याशी पंकज चौधरी को जीत हासिल हुई थी ।इस लोकसभा सीट के महत्व की बात करें तो यह सीट काफी महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है, क्योंकि यहां से भाजपा ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महराजगंज के छठी बार निर्वाचित सांसद पंकज चौधरी मैदान में हैं जबकि इंडिया गठबंधन ने कांग्रेस के फरेंदा विधायक वीरेंद्र चौधरी को मैदान में उतारकर चौधरी बनाम चौधरी की सीधी लड़ाई गई है । गौरतलब है कि दोनों प्रत्याशी चौधरी (पिछड़ी) जाति के होने के कारण पिछड़ी जातियों के वोट में सेंधवार की प्रबल संभावना है ऐसे में अगर दलित और अल्पसंख्यक मतदाता जिधर भी जाते हैं उस पार्टी की जीत निश्चित है। हालांकि महराजगंज से बहुजन समाज पार्टी ने मौसमे आलम को अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है जिससे बहुजन वोटो का ग्राफ है गिरता नजर आ रहा है जानकार यह कयास लग रहे हैं कि दलित और माइनॉरिटी वोट जिधर भी जाएगा उस पार्टी की जीत निश्चित है।
■ विकास कभी नहीं बन सका महराजगंज का चुनावी मुद्दा
चुनाव का बिगुल बजने के बाद सभी प्रत्याशी मैदान में पुरजोर आजमाइश कर रहे हैं। 18वीं लोकसभा चुनाव के महासमर में अब तक छठवें चरण का मतदान हो चुका है सातवें और अंतिम चरण के मतदान 01जून को होना सुनिश्चित है।इस चरण में महराजगंज लोकसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक तरफ बीजेपी के कद्दावर नेता एवं छठी बार के सांसद पंकज चौधरी तो दूसरी ओर इंडिया गठबंधन से कांग्रेस उम्मीदवार वीरेंद्र चौधरी जो फरेन्दा विधानसभा सीट से विधायक है और बसपा से मौसमे आलम दलित वोट के सहारे मैदान में ताल ठोक रहे हैं।आगामी एक जून को साइलेंट मतदाता अपना बहुमूल्य वोट ईवीएम में बंद कर देंगे।हालांकि इस बार के चुनाव में वोटरों का मुद्दा विकास,शिक्षा,स्वास्थ्य,बेरोजगारी है।अब देखना दिलचस्प होगा कि वोटर धर्म,जाति, महत्वपूर्ण योजनाओं, शिक्षा,स्वास्थ्य, बेरोजगारी में से किसको चुनावी मुद्दा बनाते हैं।
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