प्रसिद्ध जन्मतिथि और उनका ऐतिहासिक महत्व

“5 दिसंबर: इतिहास के वे सितारे, जिन्होंने शब्दों, साहस और संस्कार से अपना युग बदल दिया”

5 दिसंबर का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज उन महान व्यक्तित्वों का जन्मदिवस है, जिन्होंने अपने कार्य, संघर्ष, प्रतिभा और विचारों से समाज, राजनीति, साहित्य, खेल और पत्रकारिता को एक नई दिशा दी। नीचे 5 दिसंबर को जन्म लेने वाले उन महान हस्तियों के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

रवीश कुमार (जन्म: 5 दिसंबर 1974) – भारत के निर्भीक पत्रकार

रवीश कुमार का जन्म बिहार के मोतिहारी जनपद में हुआ था। उन्होंने जनसंचार में दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। वे एनडीटीवी से लंबे समय तक जुड़े रहे और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए जाने गए।

रवीश कुमार ने ग्रामीण भारत, बेरोजगारी, शिक्षा और लोकतंत्र जैसे विषयों पर खुलकर आवाज उठाई। उन्हें रैमन मैग्सेसे पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा गया। उनकी लेखनी और रिपोर्टिंग शैली उन्हें आम लोगों की आवाज बनाती है। भारत में खोजी और संवेदनशील पत्रकारिता को नई ऊंचाई देने में उनका बड़ा योगदान रहा है।

अंजलि भागवत (जन्म: 5 दिसंबर 1969) – निशाने की महारानी

अंजलि भागवत का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ। वे भारत की सबसे सफल महिला निशानेबाजों में गिनी जाती हैं। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कई अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में किया।

उन्होंने 1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। अंजलि भागवत ने भारतीय खेल जगत में महिलाओं को प्रेरित किया और यह दिखाया कि धैर्य, एकाग्रता और अभ्यास से विश्व मंच पर विजय पाई जा सकती है। बाद में वे खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण से भी जुड़ीं।

रघुवीर चौधरी (जन्म: 5 दिसंबर 1938) – गुजराती साहित्य का स्तंभ

रघुवीर चौधरी का जन्म गुजरात के अहमदाबाद जनपद में हुआ। वे एक प्रसिद्ध गुजराती लेखक, शिक्षाविद और चिंतक रहे हैं। उन्होंने गुजराती साहित्य को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी रचनाएं भारतीय समाज, राजनीति और संस्कृति की गहराई को दर्शाती हैं। उनका प्रसिद्ध उपन्यास “अमृता” साहित्य जगत में विशेष पहचान रखता है। वे कई वर्षों तक विश्वविद्यालयों से भी जुड़े रहे और नई पीढ़ी को साहित्य की ओर प्रेरित किया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

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रामानुज प्रसाद सिंह (जन्म: 5 दिसंबर 1935) – आवाज़, जो बन गई पहचान

रामानुज प्रसाद सिंह का जन्म बिहार के सारण जिले में हुआ था। वे आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के सबसे प्रसिद्ध समाचार वाचकों में से एक रहे हैं। उनकी आवाज़ में एक विशेष गंभीरता और स्पष्टता थी, जो श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालती थी।

उन्होंने देशभर में रेडियो माध्यम से खबरें पहुंचाईं और रेडियो समाचार वाचन की परंपरा को एक नई पहचान दी। उनका योगदान भारतीय प्रसारण इतिहास में अमूल्य माना जाता है।

नादिरा (जन्म: 5 दिसंबर 1932) – सशक्त अभिनय की पहचान

नादिरा का जन्म बगदाद, इराक में हुआ था, लेकिन उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे हिंदी फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक थीं, जो अक्सर सशक्त और साहसी भूमिकाओं के लिए जानी जाती थीं।

फिल्म “श्री 420” में उनका अभिनय आज भी याद किया जाता है। उन्होंने अपने दौर की पारंपरिक महिला छवि से हटकर अलग किरदार निभाए और हिंदी सिनेमा को नई सोच दी।

रमाकांत आचरेकर (जन्म: 5 दिसंबर 1932) – भारतीय क्रिकेट के गुरू

रमाकांत आचरेकर का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ। वे एक महान क्रिकेट कोच थे, जिन्होंने भारत को कई दिग्गज खिलाड़ी दिए, जिनमें सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे प्रमुख है।

शिवाजी पार्क में अपनी कोचिंग से उन्होंने बच्चों को अनुशासन, मेहनत और खेल की सच्ची भावना सिखाई। उनके मार्गदर्शन ने भारतीय क्रिकेट को विश्व स्तर पर नई मजबूती प्रदान की।

शेख मोहम्मद अब्दुल्ला (जन्म: 5 दिसंबर 1905) – कश्मीर की आवाज़

शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का जन्म श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में हुआ। वे कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री और बाद में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

उनका योगदान कश्मीर की राजनीति और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने सामाजिक समानता और लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

जोश मलीहाबादी (जन्म: 5 दिसंबर 1894) – क्रांति की कविता

जोश मलीहाबादी का जन्म उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद (लखनऊ) में हुआ था। वे उर्दू साहित्य के महान कवि और शायर थे, जिनकी कविताओं में क्रांति, राष्ट्रप्रेम और जागरूकता की झलक मिलती है।

उनकी शायरी युवा पीढ़ी में जोश भरने का काम करती थी। भारत और पाकिस्तान दोनों जगह उन्हें समान रूप से सराहा गया।

एच. सी. दासप्पा – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही

एच. सी. दासप्पा का जन्म कर्नाटक में हुआ था। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और बाद में प्रशासनिक तथा राजनीतिक क्षेत्र में भी योगदान दिया। उन्होंने देश सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म माना।

भाई वीर सिंह (जन्म: 5 दिसंबर 1872) – आधुनिक पंजाबी साहित्य के जनक

भाई वीर सिंह का जन्म अमृतसर, पंजाब में हुआ। वे कवि, विचारक और समाज सुधारक थे। उन्होंने पंजाबी भाषा को प्रतिष्ठा दिलाई और उसे साहित्य की ऊंचाइयों तक पहुँचाया।

उनकी कविताएँ आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत थीं। उन्हें आधुनिक पंजाबी साहित्य का जनक माना जाता है।

Editor CP pandey

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