बचपन के दिन याद करूँ तो मन
में एक कसक पैदा हो जाती है,
वे दिन भी क्या दिन होते थे जब
किंचित रात कभी न हो पाती थी।
युवावस्था के वैभवशाली दिन
भी अपना महत्व बतलाते हैं,
हम में से कोई कितना धनवान हो,
वह दिन वापस नहीं ला सकते हैं।
हाँ, निश्चय ही हमारी मित्रता हमें
पुनर्मिलन का अवसर तो देती है,
हम मिलते ही अपनी उन पुरानी
बीती यादों में फिर घूमने लगते हैं।
आज फिर उन दिनो की याद में आज
अपनी मित्रता को अक्षुण्ण बनाये रखें,
जीवन के पल जो बस बोनस में बचे,
उन्हें ईर्ष्या द्वेष में क्यों हम व्यर्थ करें।
जीवन में ख़ुशियाँ उनको मिलती हैं
जो औरों को ख़ुश देख ख़ुश होते हैं,
जीवन अपनी शर्तों में जीने वाले तो
ताने बाने बनाने में ही उलझे रहते हैं।
हम सबने तो अब देख लिया है
हम खुद इंसानों की पूरी ताक़त,
एक निर्जीव कीटाणु कोरोना से भी
लड़ने की नहीं थी हमारी कोई जुर्रत।
मकान, फ़्लैट, बंगला, फार्म हाउस,
मिल, फ़ैक्टरी, होटल, गाड़ी आदि
सभी यहीं पर धरे के धरे रह जाते हैं,
कोरोना वाले को तो देख नहीं पाते हैं।
जीवन जीते जी तो अमूल्य होता है,
आदित्य घमंड करें कैसा हम इस पर,
अब मरने पर तो क्या, जीते जी ही है,
छूट जाता सब कुछ काम न आता है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
इंदौर (राष्ट्र की परम्परा)। आज के दौर में जहां कई कर्मचारी लंबे काम के घंटे…
Diwali 2026 Special: भारत की सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक उत्सव, अयोध्या के दीपोत्सव से लेकर…
अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद में आमजन की सुरक्षा, महिला एवं बालिका सुरक्षा तथा पुलिस-जनता…
वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। दीपावली और छठ पर्व के चलते ट्रेनों में यात्रियों की भारी…
चमोली (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम…