डॉ. सतीश पाण्डेय
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता क्रम अब चिंता की गंभीर रेखा खींच रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगभग हर मार्ग हादसों का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। तेज रफ्तार, लापरवाहीऔर कमजोर ट्रैफिक प्रणाली मिलकर आम जनता की सुरक्षा पर सीधा खतरा बन चुके हैं।
हाल के दिनों में जिले में हुई लगातार दुर्घटनाओं ने न केवल कई निर्दोष लोगों की जान ली है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। सड़क सुरक्षा के दावों के बीच जर्जर सड़कों, टूटी पुलियों, अंधेरे मार्गों और बेबस ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत बार-बार उजागर हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात विभाग की अनदेखी और हाइवे पर निगरानी की कमी हादसों का मुख्य कारण है। कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर न होने, सड़क किनारे अवैध पार्किंग और बिना संकेतक वाले मोड़ हर दिन दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जनपद में पिछले कुछ महीनों में दुर्घटनाओं का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है, जिसमें मोटरसाईकिल और चारपहिया वाहनों की टक्कर सबसे अधिक पाई गई है। कई हादसों में दोषी वाहन चालक मौके से फरार हो जाते हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में देरी होती है।
ग्रामीण सड़कों की बदहाली भी हादसों का बड़ा कारण है। कई मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे, कटे किनारे और पानी भराव की समस्या यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ा रही है। रात में स्ट्रीट लाइट न होने से अंधेरे में दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
जिले में बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सड़कों के सुधार की मांग तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अब भी सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।फिलहाल जनता यह सवाल कर रही है कि क्या ट्रैफिक नियमों का पालन और सड़क सुधार योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? महराजगंज में बढ़ते हादसे अब चेतावनी दे रहे हैं।सड़क पर लापरवाही नहीं, सजगता जरूरी; वरना हर मोड़ बन सकता है मौत का द्वार।
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