रमजान के बाद खुशियों की सौगात लेकर आती है ईद-उल-फितर

भाई-चारा, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का देता है पैगाम

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। रमजान के पाक महीने की समाप्ति के साथ मनाया जाने वाला ईद-उल-फितर का त्योहार मुस्लिम समाज के लिए सबसे अहम और म
पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। पूरे महीने रोजा, सब्र और इबादत के बाद आने वाली यह ईद अल्लाह की रहमत और बख्शिश का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों और ईदगाहों में एकत्र होकर ईद की नमाज अदा करते हैं और देश-दुनिया में अमन, भाई-चारे और खुशहाली की दुआ मांगते हैं।
रमजान के महीने में मुसलमान रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस पूरे महीने का उद्देश्य इंसान में सब्र, संयम, त्याग और दूसरों के दुख-दर्द को समझने की भावना विकसित करना होता है। इसी तपस्या और इबादत के बाद ईद- उल-फितर का त्योहार खुशियों का संदेश लेकर आता है।
इस्लाम धर्म के अनुसार ईद केवल खुशी मनाने का पर्व नहीं, बल्कि समाज में इंसानियत, बराबरी और आपसी भाई-चारे को मजबूत करने का अवसर भी है। इस्लाम के आखिरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद साहब की तालीमात में लोगों के बीच मोहब्बत, सहानुभूति और सेवा भाव को सबसे बड़ी नेकी बताया गया है। धार्मिक ग्रंथ हदीसो में उल्लेख मिलता है कि इंसान की सबसे बड़ी अच्छाई यह है कि वह अपने भाई के लिए वही पसंद करे जो वह अपने लिए पसंद करता है।
पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने फरमाया है कि सबसे बेहतर इंसान वह है जो इंसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद हो। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए ईद के मौके पर मुस्लिम समाज के लोग जकात और सदका देकर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। ताकि समाज का हर वर्ग इस त्योहार की खुशियों में शामिल हो सके और किसी के घर की खुशियां अधूरी न रह जाएं।
ईद की नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलकर ईद मुबारक कहते हैं और आपसी प्रेम व भाई-चारे का संदेश देते हैं। घरों में सेवइयां, खीर और अन्य मिठाइयां बनती हैं। बच्चे नए कपड़े पहनकर ईद की खुशियां मनाते हैं और बड़ों से ईदी प्राप्त करते हैं। पूरे माहौल में खुशी, उत्साह और अपनत्व की झलक देखने को मिलती है।
उलेमा का कहना है कि ईद-उल-फितर का असली संदेश समाज में मोहब्बत, रहमत, बराबरी और इंसानियत को बढ़ावा देना है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि खुशियों को बांटने से ही समाज में एकता और सौहार्द मजबूत होता है। पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब की तालीमात आज भी पूरी दुनिया को अमन, भाई-चारे और इंसानियत की राह दिखाती हैं।

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