मईल/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) प्रदेश सरकार द्वारा जनहित में राष्ट्रीय संपत्ति की बचा ने के लिए कदम तो अवश्य उठारही हैं लेकिन अधिकारियों की मनमानी के कारण गांव की पोखरियो पर गांव के सार्वजनिक जमीनों पर लूट खसोट मची हुई है गांव के प्रधानों द्वारा इसकी सूचना तहसील स्तर पर दिए जाने के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है ।आवेदन पत्र दे दिए जाने के बाद तो तहसील के स्तर से भारी घोटालों के बाद पोखरीयो के ऊपर अवैध कब्जा दखल की होड़ मची हुई है। बरहजतहसील के अंतर्गत कुछ गांव में तो पोखरियों की नवायत बदलकर कागज में हेराफेरी करके पोखरियो पर कब्जा दखल कर लिए कर लिए गए हैं ।यह ही नहीं शासन की महत्वपूर्ण योजनाएं अमृत सरोवर बनाने के लिए जब प्रस्ताव दिए जा रहे हैं तो अवैध कब्जा करने वाले लोग अमृत सरोवर तक नहीं बनने दे रहे हैं उच्चतम न्यायालय का शासनादेश है किसी भी पोखरीकी भूमि या खसरे में हेरा फेरी नहीं की जा सकती है और ना ही कोई पट्टा दिया जा सकता है
जिला प्रशासन कोजनपदकी सारी पोखरियो को लुटेरों से बचाने वाला आभियान की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहिए।
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