बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) टीबी रोग सिर्फ रोगी या उसके परिवार की समस्या नहीं है बल्कि यह एक जन सामान्य समस्या है । रोगी के छींकने व खांसने से फैलने वाला यह रोग किसी को भी हो सकता है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, इस रोग से देश में हर साल पाँच लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। इसके प्रसार को रोकने व इस बीमारी के प्रति जन जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है । इस वर्ष थीम है , हम टीबी खत्म कर सकते हैं। यह बाते टीबी दिवस से पूर्व मीडिया कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश कुमार सिंह ने कहा। टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति का जल्द इलाज शुरू कर इसके प्रसार को रोका जा सकता है। क्योंकि इलाज शुरू करने से व्यक्ति की खांसी संक्रमण रहित हो जाती है। इससे जहां एक ओर रोग का प्रसार कम हो जाता है वहीं जल्द इलाज शुरू होने से व्यक्ति को जल्द ही रोग से मुक्ति मिल जाती है ।
टीबी उन्मूलन ऐसे करें -जिला स्वास्थ्य ,शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि देश को 2025 तक टीबी से मुक्त होने के लिये हर व्यक्ति सहयोग करना होगा। टीबी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ संदीप मिश्रा ने कहा कि टीबी के कुछ लक्षण जैसे दो हफ्ते से अधिक समय से खांसी व बुखार आने पर भ्रम वश कुछ लोग इसे साधारण सर्दी जुखाम समझ लेते हैं। जबकि यह लक्षण टीबी के भी हो सकते हैं । इसकी जांच जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, जिला क्षय नियंत्रण केंद्र ( जिला टीबी अस्पताल ) के अलावा हर माह की 15 तारीख को सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर व सीएचसी ,पीएचसी पर एकीकृत दिवस में कराई जा सकती है । जांच में टीबी की पुष्टि होने पर समय से इलाज का पूरा कोर्स कर इस रोग से सिर्फ छह माह में ही छुटकारा पाया जा सकता है।भारत सरकार की ओर से 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की योजना है। यह तभी सार्थक हो सकती है जब टीबी के खात्मे को लेकर जनपद के हर वर्ग का सहयोग मिले। वर्तमान में 1306 रोगियों को गोद लेकर उन्हें पोषण सामग्री दी जा रही है । शेष टीबी मरीजों को अधिक से अधिक लोग निक्षय मित्र के रूप गोद लेकर उन्हें स्वस्थ बनाने में सहयोग कर रहे है।
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