डीएम ने की मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रगति की समीक्षा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रगति की समीक्षा की गई।
जिलास्तरीय समिति की बैठक करते हुए जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना में प्राप्त हुए आवेदनों की जानकारी ली और कहा कि जनपद में मत्स्य पालन का कार्य परम्परागत तरीके से किया जा रहा है। इन तालाबों की वार्षिक मत्स्य उत्पादकता मात्र 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इन तालाबों की गुणवत्ता व मत्स्य पालन के तरीके में सुधार कर मत्स्य उत्पादकता को 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इससे ग्राम सभा के तालाबों के प‌ट्टाधारको व मछुआरों की आय में वृद्धि व उनका आर्थिक व सामाजिक उत्थान भी किया जा सकता है। यह मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने समिति की ओर से योजना के तहत आवेदन की तिथि में वृद्धि हेतु निदेशक मत्स्य विभाग को पत्र प्रेषित करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने योजना के व्यापक प्रचार–प्रसार हेतु भी निर्देशित किया।
इससे पूर्व सहायक निदेशक मत्स्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ग्राम सभा के तालाब के पट्टा धारकों के लिए निषाद राज बोट सब्सिडी योजना, सघन मत्स्य पालन हेतु एयरेशन सिस्टम की स्थापना केवल महिला मत्स्य पालकों के लिए
व उत्तर प्रदेश मत्स्य पालक कल्याण कोष अंतर्गत मछली विक्रय के लिए मोपेड विद आइबाक्स परियोजना एवं अंतर्राज्यीय भ्रमण, दक्षता विकास, प्रदर्शनी और सेमिनारों के लिए मत्स्य पालकों, मछुआरों का प्रशिक्षण व भ्रमण कार्यक्रम आदि संचालित किया जाता है। उन्होंने बताया कि योजना को ग्राम सभा के तालाबों के प‌ट्टाधारकों व मछुआरों के लिए परिकल्पित किया गया है। मनरेगा कनवर्जेन्स अथवा प‌ट्टाधारक द्वारा स्वयं तथा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में प्रथम वर्ष निवेश पर अनुदान हेतु इकाई लागत धनराशि रू0 4.00 लाख प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा।
ग्राम सभा अथवा अन्य पट्टे के तालाबों के प‌ट्टाधारक एवं प‌ट्टाधारी मत्स्य जीवी सहकारी समितियों को अधिकतम 2.0 हे० क्षेत्रफल के तालाब की सीमा तक योजना का लाभ दिया जाएगा। जनपद में पट्टे पर आवंटित ग्राम सभा अथवा अन्य प‌ट्टे के तालाबों के इच्छुक ऐसे आवेदक चयन हेतु पात्र होंगे, जिनके तालाब के प‌ट्टे की अवधि न्यूनतम 04 वर्ष शेष हो और चयनित लाभार्थी कम से कम 4 वर्ष तक आवेदित तालाब पर मत्स्य पालन करेगा।
इस दौरान बैठक में जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया, सहायक निदेशक मत्स्य संजय कुमार, उपनिदेशक कृषि संजीव कुमार, एलडीएम बी.एन. मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी और प्रगतिशील मत्स्य पालक उपस्थित रहें।

rkpnews@somnath

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