महाशिवरात्रि पर शिव पुराण से दिव्य शिव कथा: भोलेनाथ की कृपा, विवाह और मोक्ष का रहस्य


लेखक: पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा)


महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का वह पावन पर्व है, जब संपूर्ण सृष्टि में शिवतत्त्व की अनुभूति होती है। शिव पुराण के अनुसार यह वही रात्रि है, जब भगवान शिव पूर्ण चेतना में अवतरित हुए, वैराग्य से गृहस्थ जीवन को अपनाया और सृष्टि के कल्याण हेतु लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त किया। महाशिवरात्रि पर शिव कथा न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन है, बल्कि जीवन के संघर्षों में धैर्य, करुणा और विवेक का प्रकाश भी देती है। इस विशेष लेख में हम शिव पुराण से शिव कथा, महिमा, पूजा-विधि और गूढ़ रहस्यों को प्रस्तुत कर रहे हैं।
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की उत्पत्ति
शिव पुराण में वर्णित है कि सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्मा और विष्णु के मध्य श्रेष्ठता का प्रश्न उठा, तब अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव प्रकट हुए। इस दिव्य स्तंभ का आदि-अंत किसी को न मिला। तब शिव ने कहा—जो इस ज्योति का रहस्य समझेगा, वही तत्वज्ञान पाएगा। यही शिवलिंग निराकार से साकार की अनुभूति है, जो हमें बताता है कि शिव ऊर्जा हैं—अविनाशी, असीम और करुणामय।
महाशिवरात्रि पर शिव कथा का यह अंश साधक को अहंकार से मुक्त कर सत्य की ओर ले जाता है।

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पार्वती तपस्या और शिव-विवाह की कथा
देवी सती के देहत्याग के पश्चात शिव योग में लीन हो गए। लोककल्याण हेतु देवी पार्वती ने कठोर तप किया। शिव पुराण में वर्णन है कि पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अर्धांगिनी रूप में स्वीकार किया। यह विवाह केवल दांपत्य नहीं, बल्कि शक्ति और शिव के समन्वय का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि वही रात्रि मानी जाती है, जब शिव-पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ। इसलिए शिव पुराण से शिव कथा में यह पर्व गृहस्थ और वैराग्य—दोनों के संतुलन का संदेश देता है।

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समुद्र मंथन और नीलकंठ की महिमा
देव-दानवों के समुद्र मंथन में जब विष निकला, तब सृष्टि संकट में पड़ गई। शिव ने करुणा से विष पी लिया और उसे कंठ में धारण किया—इसी से वे नीलकंठ कहलाए। यह कथा बताती है कि सच्चा योगी स्वयं कष्ट सहकर भी जगत की रक्षा करता है।
महाशिवरात्रि पर शिव कथा का यह प्रसंग हमें त्याग, सेवा और धैर्य का पाठ पढ़ाता है।

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शिवलिंग अभिषेक का आध्यात्मिक अर्थ
शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घृत, शहद और गंगाजल से अभिषेक करने से पंचतत्त्व संतुलित होते हैं।
जल: शांति और शीतलता
दूध: पवित्रता
दही: समृद्धि
घृत: तेज
शहद: मधुरता
महाशिवरात्रि की रात्रि में किया गया अभिषेक विशेष फलदायी माना गया है। महाशिवरात्रि पर शिव कथा के साथ यह साधना मन को स्थिर करती है।

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महाशिवरात्रि व्रत और जागरण का महत्व
शिव पुराण कहता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से पाप क्षय होता है। यह रात्रि आत्मनिरीक्षण की है—अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा।
शिव पुराण से शिव कथा का श्रवण और रुद्राभिषेक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
शिव—योग, ज्ञान और करुणा का समन्वय
शिव आदियोगी हैं—ध्यान के शिखर। वे भस्मधारी हैं—असार संसार की स्मृति। वे करुणामय हैं—भक्तवत्सल। यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर शिव कथा हर वर्ग, हर आयु और हर साधक को जोड़ती है।

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शिव कथा का सामाजिक संदेश
आज के युग में शिव कथा हमें बताती है कि शक्ति का उपयोग करुणा के साथ हो, ज्ञान अहंकार नहीं बने और वैराग्य पलायन नहीं, बल्कि संतुलन हो। शिव पुराण से शिव कथा समाज में समरसता, सेवा और सत्यनिष्ठा का मार्ग दिखाती है।
महाशिवरात्रि केवल पर्व नहीं—आत्मा का उत्सव है। शिव पुराण की यह दिव्य कथा जीवन को दिशा देती है। भोलेनाथ की कृपा से हर साधक अपने भीतर के विष को अमृत में बदल सकता है।
महाशिवरात्रि पर शिव कथा पढ़ें, सुनें और जीवन में उतारें—यही शिवभक्ति का सार है।

Editor CP pandey

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