देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)l
एचआईवी/एड्स जैसी गंभीर और संवेदनशील बीमारी के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर सही जानकारी के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने से ही संक्रमण की दर में कमी लाई जा सकती है। यह बात मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) राजेश कुमार सिंह ने कही। वे बुधवार को विकास भवन स्थित गांधी सभागार में आयोजित ‘सुरक्षा से संपूर्ण सुरक्षा तक रणनीति’ विषयक जिला स्तरीय जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
सीडीओ ने कहा कि एचआईवी/एड्स को लेकर आज भी समाज में कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं, जिसके कारण संक्रमित व्यक्ति सामाजिक भेदभाव और मानसिक दबाव का सामना करता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही जानकारी, परामर्श और जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी जाए, तो इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने सभी विभागों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य करने वाले जिले के 39 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सीडीओ ने सभी सम्मानित कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका एचआईवी/एड्स की रोकथाम में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका सतत प्रयास ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
एचआईवी/एड्स से जुड़ी भ्रांतियां दूर करना आवश्यक: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शैलजा मिश्रा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि एचआईवी/एड्स के प्रति समाज में फैली नकारात्मक सोच और भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने एचआईवी/एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 2017 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह कानून एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है।
उन्होंने कहा कि एचआईवी केवल शहरी क्षेत्रों की समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। जोखिमग्रस्त समूहों तक प्रभावी पहुंच बनाकर उन्हें समय पर जांच, परामर्श और उपचार सेवाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है।
जिले में जांच और परामर्श सेवाएं हो रही हैं सुदृढ़: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, जांच और परामर्श सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकास खंड में चरणबद्ध तरीके से उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य कर्मी अद्यतन जानकारी के साथ कार्य कर सकें।
एचआईवी के कारण, लक्षण और बचाव पर दी गई विस्तृत जानकारी
कार्यशाला में क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. नितीश राय ने एचआईवी/एड्स के कारण, लक्षण, संक्रमण के तरीके, बचाव के उपाय, जांच प्रक्रिया और उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान और नियमित उपचार से संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।
उन्होंने आगामी माह तक जिले के उन 10 चिन्हित गांवों का माइक्रोप्लान भी प्रस्तुत किया, जहां एचआईवी पॉजिटिव मामलों और प्रवासी आबादी की संख्या अधिक है। इन गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर जांच, परामर्श और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
बहु-विभागीय सहभागिता पर दिया गया जोर
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि एचआईवी/एड्स की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विधिक सेवा प्राधिकरण और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में डीटीओ डॉ. राजेश कुमार, समस्त अपर एवं उप मुख्य चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिशा कमेटी से बृजेश और अफजल, संपूर्ण सुरक्षा केंद्र से सीएम उपाध्याय, आईटीएसिटी से शिरीष त्रिपाठी, विद्या प्रकाश गौतम, चंद्र प्रकाश त्रिपाठी, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, मेडिकल कॉलेज, एआरटी सेंटर, आईसीटीसी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समाज में संवेदनशीलता और स्वीकार्यता की जरूरत
वक्ताओं ने कहा कि एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्तियों को सहानुभूति, सम्मान और समान अधिकार मिलना चाहिए। भेदभाव और डर के कारण कई लोग जांच और उपचार से दूर रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समाज को संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार
कार्यशाला के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जागरूकता, समय पर जांच और नियमित उपचार ही एचआईवी/एड्स के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों में जनसहयोग से ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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