कृष्ण जन्म व राम जन्म का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)जनपद में तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत सेमरा हर्दोपट्टी में श्री हनुमान कथा कुंज राधेश्याम मंदिर परिसर मे़ आयोजित सात दिवसीय अखंड सीताराम नाम संकीर्तन व श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के प्रथम दिन गुरुवार की रात मध्यप्रदेश के चित्रकूट से पधारी कथावाचिका उमा शास्त्री व अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक ज्ञानप्रकाश पांडेय ने श्रोताओं को रामजन्म व कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया।
कथावाचिका ने कहा कि लंकापति रावण के अत्याचार से कराह रही पृथ्वी ने देवताओं से रक्षा की प्रार्थना की। देवताओं द्वारा भगवान विष्णु से माता पृथ्वी को रावण के अत्याचार से मुक्ति देने की प्रार्थना की गई। भगवान विष्णु द्वारा राम अवतार की भविष्यवाणी करने और अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में पृथ्वी पर पहुंचकर माया रखते हुए पृथ्वी की रक्षा का संकल्प लिया। राजा दशरथ के संतान न होने के कारण अपने कुलगुरु वशिष्ठ जी के पास जाते हैं। जहां वशिष्ठ जी द्वारा श्रृंगी ऋषि से पुत्रयेष्टि यज्ञ करवाते है। यज्ञ कुंड से अग्नि देवता का प्रकट होकर राजा दशरथ को खीर प्रदान करते हैं। जिसके बाद राजा दशरथ द्वारा तीनों रानियों कौशल्या, कैकई और सुमित्रा को खीर देते है। उस खीर के खाने से तीनों रानियों को भगवान राम सहित भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि संसार व समाज में फैले अनाचार, अधर्म व निरंकुश शासन कर रहे जरासंध, कंस, शिशुपाल जैसे अधर्मियो का अंत करने के लिए भगवान कृष्ण को अवतार लेना पड़ा और समाज का कल्याण हुआ। हमारे बीच भगवान आनंद रूप में प्रकट होते तो हैं तो विषय वासनाओं का अंत होता है। छांगुर सिंह ने तबला व अलीशेर खां ने ऑर्गन पर संगत की। इस दौरान मुख्य आयोजक महंत बालक दास उर्फ श्याम दास जी महाराज,  यज्ञाचार्य अभिषेक शुक्ल, प्रधान अंगद रजक, प्रेम शंकर सिंह, राजू माली, परमहंस सिंह, उत्तीम राव, पीटर सिंह, हेमंत सिंह, जयराम प्रसाद, टोनी सिंह, प्रेम शंकर सिंह, महेश पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

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