सादुल्लानगर/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। स्थानीय क्षेत्र में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवे दिन कथा व्यास आचार्य पंडित ओम नारायण मिश्रा(दद्दन मिश्रा) ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जी की मित्रता का मार्मिक और भावविभोर कर देने वाला प्रसंग प्रस्तुत किया। कथा स्थल पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से गूंज उठा।
आचार्य ने बताया कि सुदामा चरित्र केवल एक मित्रता की कथा नहीं, बल्कि वह उदाहरण है जिसमें त्याग, प्रेम, श्रद्धा और सेवा की पराकाष्ठा देखने को मिलती है। गरीबी में भी संतोष का भाव और भगवान पर अटूट विश्वास सुदामा जी के चरित्र की विशेषता है। उन्होंने कहा कि सुदामा जी जब अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, तो भगवान ने अपने मित्र का ऐसा सम्मान किया कि स्वयं प्रभु ने उनके चरण धोए और अपने महल के फर्श पर उन्हें बिठाया। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्चा भक्त या सच्चा मित्र पद, प्रतिष्ठा या वैभव से नहीं, बल्कि भावना और निष्ठा से मूल्यवान होता है।
कथा के दौरान भजन गायन और संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। “सुदामा गए द्वारिका नगरी…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
कार्यक्रम संयोजक आकाश शर्मा ने बताया कि यह कथा यज्ञ पूज्य पिता जी रामचन्द्र शर्मा के स्मृति को समर्पित किया गया है। कथा में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
बीते दिनों में गोवर्धन लीला, रुक्मिणी विवाह और श्रीकृष्ण उपदेश की कथाएं सुनाई गई। आयोजन स्थल पर प्रसाद वितरण और भंडारे की भी व्यवस्था की गई है।
इस अवसर पर राजकिशोर शर्मा,राम अभिलाष शर्मा,संजीव,अश्वनी कुमार(दरोगा),अवधेश कुमार, शशिधर शर्मा,प्रशांत शर्मा,रमेश शर्मा, विनोद शर्मा आदि सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।
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