पुण्यतिथि: साहित्य,राजनीति व स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयो तक

25 जनवरी को हुए निधन: इतिहास के पन्नों में अमर हुईं ये महान विभूतियाँ

25 जनवरी विशेष भारत और विश्व के इतिहास में 25 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों की स्मृति का दिन है, जिनके योगदान ने साहित्य, राजनीति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण को नई दिशा दी। 25 जनवरी को हुए निधन की यह सूची हमें न केवल अतीत से जोड़ती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि विचार और कर्म कभी मरते नहीं।
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🔹 कृष्णा सोबती (निधन: 25 जनवरी 2019)
हिंदी साहित्य की निर्भीक आवाज़
कृष्णा सोबती हिंदी साहित्य की उन महान लेखिकाओं में से थीं, जिन्होंने भाषा को सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे संवेदना और साहस का माध्यम बनाया। ‘मित्रो मरजानी’, ‘डार से बिछुड़ी’ और ‘ज़िंदगीनामा’ जैसे उपन्यासों ने हिंदी कथा-भाषा को नई ताजगी दी।
25 जनवरी को हुआ उनका निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति था। उन्हें साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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🔹 विजयाराजे सिंधिया (निधन: 25 जनवरी 2001)
भारतीय राजनीति की आयरन लेडी
विजयाराजे सिंधिया भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक नेताओं में गिनी जाती थीं। वे एक सशक्त वक्ता, जननेता और संगठनकर्ता थीं। आपातकाल के दौर में उनके संघर्ष को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है।
25 जनवरी को हुए निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक साहसी और निडर नेता को खो दिया।
🔹 जी. जी. स्वेल (निधन: 25 जनवरी 1999)
लोकतंत्र की गरिमा के रक्षक
जी. जी. स्वेल भारत की लोकसभा के उपाध्यक्ष रहे। वे संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के सशक्त समर्थक थे। उत्तर-पूर्व भारत से राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
25 जनवरी इतिहास में उनका नाम एक संतुलित और निष्पक्ष संसदीय नेता के रूप में दर्ज है।

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🔹 अनंता सिंह (निधन: 25 जनवरी 1969)
स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक
अनंता सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन क्रांतिकारियों में थे, जिनका योगदान इतिहास की मुख्यधारा में कम चर्चा में रहा, लेकिन उनका बलिदान अतुलनीय था। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कई आंदोलनों में भाग लिया।
25 जनवरी को हुए निधन के साथ एक क्रांतिकारी युग का अंत हुआ।
🔹 नलिनी रंजन सरकार (निधन: 25 जनवरी 1953)
आर्थिक और शैक्षणिक विकास के शिल्पकार
नलिनी रंजन सरकार एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, अर्थशास्त्री और सार्वजनिक नेता थे। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे और भारत की औद्योगिक नीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
25 जनवरी को हुआ उनका निधन भारतीय आर्थिक इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था।

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🔹 विलियम वेडरबर्न (निधन: 25 जनवरी 1918)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विदेशी समर्थक
विलियम वेडरबर्न ब्रिटिश नागरिक होते हुए भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रबल समर्थक थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारतीयों के अधिकारों की वकालत ब्रिटिश संसद तक की।
25 जनवरी इतिहास में उनका योगदान भारत-ब्रिटेन संबंधों के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।
🔸 25 जनवरी को हुए निधन का ऐतिहासिक महत्व
25 जनवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत का इतिहास केवल युद्धों और आंदोलनों से नहीं, बल्कि विचारों, साहित्य, लोकतंत्र और सामाजिक चेतना से भी बना है। यह दिन हमें उन विभूतियों को स्मरण करने का अवसर देता है, जिनकी विरासत आज भी जीवित है।

Editor CP pandey

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