मार्ट मीटर परियोजना को लेकर माकपा का धरना प्रदर्शन

माकपा ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम को सौपा

रायपुर/छत्तीसगढ़(राष्ट्र की परम्परा)
प्री-पेड स्मार्ट मीटर परियोजना कॉर्पोरेट मुनाफे और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के लिए लागू की जा रही है। इससे न केवल गरीबों के घर अंधेरे में डूबेंगे, बल्कि हजारों बिजली कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। इस जनविरोधी परियोजना का माकपा सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी। उक्त बातें माकपा के राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पराते ने कहा।
माकपा के राज्यव्यापी आह्वान पर शनिवार को धमतरी में इस परियोजना के खिलाफ बड़ी संख्या में माकपा, सीटू और छत्तीसगढ़ किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। धरना में बिजली विभाग में काम कर रहे ठेका मजदूरों ने भी हिस्सा लिया।
धरना को संबोधित करते हुए पराते ने आरोप लगाया कि अडानी और टाटा की कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे स्मार्ट मीटर के लिए बाजार बनाने के लिए वर्तमान मीटरों को बदला जा रहा है, जिनका जीवनकाल केवल 5-6 साल ही है। इन प्री-पेड स्मार्ट मीटरों की कीमत इस समय 8000 रुपए है।छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार इन मीटरों को बदलने के लिए सरकारी खजाने से 5000 करोड़ रुपए स्वाहा कर रही है, लेकिन भविष्य में इसका बोझ उपभोक्ताओं पर लादा जाएगा। माकपा नेता ने आरोप लगाया कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण की ओर यह कदम है और आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन और वितरण का काम भी इन्हीं कॉर्पोरेट कंपनियों को सौंपा जाएगा, जिसके बाद ये कंपनियां बढ़े-चढ़े दरों पर बिजली बेचेगी और गरीब इसे खरीदने की स्थिति में नहीं होंगे।
धरना का नेतृत्व कर रहे समीर कुरैशी, मनीराम देवांगन, पुरुषोत्तम साहू, रेमन यादव आदि ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जहां भी स्मार्ट मीटर लगे हैं, आम जनता का अनुभव है कि उनकी जेबों में डकैती डाली जा रही है और इन मीटरों का बहिष्कार हो रहा है। बिजली विधेयक के इस प्रावधान से रात के लिए बिजली की दरें अधिक होंगी और क्रॉस सब्सिडी खत्म की जाएगी, इसका उन्होंने विरोध किया।
ठेका बिजली कर्मचारियों के नेता दुर्गेश देवांगन ने कहा कि पूरी दुनिया में बिजली वितरण का काम सार्वजनिक क्षेत्र में है और यहां भाजपा सरकार इसका निजीकरण कर रही है। इससे छत्तीसगढ़ में ही हजारों स्थाई और ठेका कर्मचारियों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। बेरोजगारों को रोजगार देने का दावा करने वाली भाजपा सरकार का यही असली चेहरा है।
धरना में तुलसीराम निर्मलकर, दयाराम साहू, चंदन कोर्राम, हरीश परते, ललिता साहू, सरला शर्मा, अनुसूईया कंडरा, सागर राम निषाद, राम ईलाखत निषाद, जी आर बंजारे आदि प्रमुख रूप से शामिल थे। धरना के बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया।

rkpnews@desk

Recent Posts

पुरंदर संधि से आगरा दरबार तक: शिवाजी की ऐतिहासिक यात्रा

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा लेख डेस्क)महाराष्ट्र का वर्तमान छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व नाम औरंगाबाद) इतिहास के…

6 minutes ago

खेरिया एयरपोर्ट पर तेज निर्माण, आगरा को मिलेगी नई हवाई पहचान

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। आगरा सिविल एयरपोर्ट को आधुनिक हवाई सेवाओं से जोड़ने की दिशा…

28 minutes ago

गौआश्रय स्थल मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति, दोषियों पर होगी कार्रवाई

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सक्सेना चौक पर सामने आए गोवंश अस्थि प्रकरण को लेकर जिला…

31 minutes ago

एकमुश्त कर जमा योजना से वाहन स्वामियों को बड़ी राहत

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। कुशीनगर में आयोजित परिवहन कर मेला छोटे व्यवसायिक वाहन स्वामियों के…

1 hour ago

आगरा मंडल में कर वसूली समीक्षा, जिलों को सख्त निर्देश

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के आगरा मंडल में राजस्व संग्रह और जन शिकायत…

2 hours ago

ट्राम्बे इंजन हटाने पर बवाल, धरोहर बनाम विकास बहस तेज

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विकास के दावों के बीच एकमा डिपो स्थित ऐतिहासिक ट्राम्बे…

2 hours ago