सीएम योगी भीम नगरी का करेंगे उद्घाटन

मंच से पीडीए की धार करेंगे कुंद

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले से 2024 के लोकसभा चुनाव में सीट घाटे का दंश झेल चुकी भारतीय जनता अब इसकी धार कुंद करने में जुट गई है।डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती के एक दिन पहले प्रतिमाओं और पार्कों में सफाई और दीपांजलि के बाद भीम नगरी के आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की सहमति, यही इशारा दे रही है। बता दें कि भीम नगरी समारोह इस बार कुछ खास होने जा रहा है।इस आयोजन में सीएम योगी आ रहे हैं। सीएम कार्यक्रम का उदघाटन करेंगे और डेढ़ घंटे तक शहर में रहेंगे। बता दें कि आगरा दलितों का गढ़ माना जाता है,आगरा में कई विधानसभा सीटों पर दलित वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। भाजपा दलितों को पार्टी से फिर जोड़कर अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है।केंद्र की मोदी सरकार और योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी बने दलित वोटरों ने 2014 से 2022 के विधानसभा चुनाव तक भाजपा का हर स्तर पर खूब साथ दिया।यूपी में डबल इंजन की सरकार बनी तो अधिकांश जिलों में ट्रिपल इंजन की भी सरकार बनी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए फार्मूले के प्रभाव में आए दलित वोटर भाजपा से दूरी बना ली।भाजपा को यूपी में सीटों का बड़ा घाटा हुआ।चिंता का विषय बने इस समीकरण को तोड़ने के लिए भाजपा नेतृत्व ने डाॅक्टर भीमराव आंबेडकर जयंती को अवसर के तौर पर लिया है। देश भर में विभिन्न आयोजनों के माध्यम से दलित वोटर को भाजपा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।भीम नगरी के उद्घाटन कार्यक्रम में आएंगे सीएम इसी क्रम में आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा के सेक्टर 11 में आयोजित भीम नगरी का उद्घाटन करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आएंगे।इससे पहले भी आयोजन समिति ने सीएम को कई बार आमंत्रित किया था,लेकिन वह नहीं आ पाए थे।लगातार तीन लोकसभा चुनाव में बसपा के हाथ खाली रहने के लिए उसका कोर वोटर छिटकना माना जाता है। भाजपा दलित वोटर को पालने में बनाए रखने की जुगत में जुटी 2027 के विधानसभा चुनाव में अगर दलित वोटर बसपा की तरफ रुख करता है तो ये भाजपा के लिए बड़े घाटे का सबब बन सकता है।ऐसे में भाजपा की इस मशक्कत को दलित वोटर को अपने पाले में बनाए रखने की जुगत भी माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने का भ्रम फैलाकर दलित वोटरों को अपने पाले में करने में सफल रही कांग्रेस भी दलितों को अपने साथ जोड़े रखने की कोशिश में है।

Karan Pandey

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