नयी दिल्ली एजेंसी।पचास साल पहले नासा के अपोलो मिशन के बाद से ये पहली बार है जब कोई कैप्सूल चांद पर पहुंचा है। ओरियन उन जगहों पर भी जाएगा जहां अपोलो गया था। नासा 2024 में अंतरिक्ष यात्रिों को चांद के आसपास भेजना चाहता है। आर्टेमिस-1 ने पिछले हफ्ते चांद के पास से उड़ान भरी थी। इसका सफल प्रक्षेपण हुआ। नासा के अनुसार ओरियन सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया है। इसकी रफ्तार 5 हजार 102 मील प्रति घंटा है। अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी का दावा है कि मिशन ‘आर्टेमिस-1’ अप्रत्याशित रूप से सफल रहा है।
उस तस्वीर को नासा ने लोगों के साथ साझा किया है। ओरियन द्वारा ली गई छवि से पता चलता है कि पृथ्वी आकाश में एक नीली गोल गेंद की तरह स्थित है। इसकी कोई चमक नहीं है। कई लोग 230 हजार मील दूर से दुनिया की तस्वीरें देखकर बोर हो जाते हैं। इससे पहले नासा ने चंद्रमा के पथ पर ओरियन की स्थिति की कई तस्वीरें पोस्ट की थीं। वहां देखा गया कि अमेरिकी अंतरिक्ष यान किस तरह अंतरिक्ष के गहरे अंधेरे में पृथ्वी के इकलौते उपग्रह की ओर बढ़ रहा है। नासा ‘आर्टेमिस’ मिशन के जरिए लोगों को फिर से चांद पर भेजने की योजना बना रहा है। यह मिशन कुल तीन चरणों में पूरा होगा। मानव रहित अंतरिक्ष यान ‘ओरियन’ ने पहले चरण में ‘आर्टेमिस-1’ के जरिए चंद्रमा को पार कर लिया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर लै।
ओरियन 11 दिसंबर को पृथ्वी पर वापस आ जाएगा। ये कैलिफ़ोर्निया के तट से दूर प्रशांत महासागर में उतरेगा। अगर आर्टेमिस 1 मिशन सफल रहता है, तो नासा आर्टेमिस 2 की तैयारी करेगा। इस मिशन के अंतर्गत, 2024 या उसके आसपास अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के आसपास भेजा जाएगा। 2025 में, नासा ने आर्टेमिस 3 को लॉन्च करने की योजना बनाई है, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा।
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