इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, किसी ने बनाया गैस लीक अलार्म तो किसी ने तैयार किया दृष्टिबाधितों की मदद करने वाला स्मार्ट चश्मा
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। आसमान में उड़ते रॉकेट, लॉन्चिंग की रोमांचक प्रक्रिया और विज्ञान के अनोखे प्रयोग…! कुशीनगर के पिपराघाट जंगली पट्टी में आयोजित इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 ने स्कूली बच्चों के भीतर छिपे वैज्ञानिक को नई उड़ान दे दी। यहां बच्चों ने न सिर्फ रॉकेट और कैनसैट की लॉन्चिंग को करीब से देखा, बल्कि अपने हाथों से तैयार किए विज्ञान मॉडल प्रदर्शित कर यह भी दिखाया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने विद्यार्थियों को रॉकेट और कैनसैट की लॉन्चिंग की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि इनकी तैयारी और प्रक्षेपण किस तरह किया जाता है। लॉन्चिंग का रोमांचक नजारा देखकर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। दूसरी ओर, प्राथमिक विद्यालय जंगली पट्टी के विद्यार्थियों की विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी ने सबका ध्यान खींचा।
कहीं स्मार्ट होम तो कहीं गैस रिसाव का अलार्म!
प्रदर्शनी में सलोनी, अभय, विनय, तृप्ति, पलक और खुशी ने स्मार्ट होम का मॉडल तैयार किया। इसकी खासियत यह है कि दरवाजा खुलने पर मोबाइल पर चेतावनी का अलार्म बजने लगता है। बच्चों ने बताया कि मॉडल में एलपीजी गैस रिसाव की स्थिति में भी अलर्ट देने की परिकल्पना की गई है। कक्षा छह और सात की छात्राओं रूख्सार और गुनगुन ने सेंसर आधारित स्मार्ट डोर बनाया। उनके मॉडल में किसी व्यक्ति के दरवाजे के पास पहुंचते ही दरवाजा अपने आप खुलता है और अंदर प्रवेश के पांच सेकेंड बाद बंद हो जाता है। इन छोटे-छोटे प्रयोगों में बच्चों की तकनीकी समझ और रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश साफ नजर आई।
दृष्टिबाधितों की मदद से लेकर मोबाइल कंट्रोल कार तक
कक्षा सात की छात्राओं तान्या और चांदनी ने दृष्टिबाधित लोगों की सहायता के लिए सेंसरयुक्त डेमो चश्मा बनाया। उनके अनुसार, सेंसर करीब पांच मीटर की दूरी पर सामने मौजूद वस्तु का पता लगाकर चेतावनी की आवाज देता है, ताकि रास्ते में बाधा होने पर उपयोगकर्ता सतर्क हो सके। इसी कक्षा की पलक और पुष्पा ने मोबाइल के वाई-फाई से नियंत्रित होने वाली कार तैयार की, जिसे फोन से अलग-अलग दिशाओं में चलाया जा सकता है। वहीं, कक्षा छह और सात के परदेशी कुमार, अभिमन्यु, राजकिशोर और आकाश ने कागज से रॉकेट और कैनसैट के मॉडल बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
पिछले साल दर्शक थे, इस बार अपने मॉडल लेकर पहुंचे बच्चे
परिषदीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि पिछले साल आयोजित रॉकेट्री प्रतियोगिता ने उनके भीतर विज्ञान के प्रति रुचि जगाई थी। इस बार वे केवल लॉन्चिंग देखने नहीं आए, बल्कि अपने प्रयोगों के साथ मैदान में उतरे। यह बदलाव बताता है कि ऐसे आयोजन बच्चों को सवाल पूछने, प्रयोग करने और नए विचार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। कार्यक्रम में न्यू इरम कॉन्वेंट स्कूल, तमकुहीराज की कक्षा सात, आठ और नौ के विद्यार्थियों के साथ द प्रेसिडेंट पब्लिक स्कूल, दनियारी तथा जगदीश पब्लिक स्कूल, गौरी श्रीराम के छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया। बच्चों ने रॉकेट और कैनसैट की लॉन्चिंग देखी तथा अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं। कुशीनगर के इस आयोजन में बच्चों का उत्साह और उनके बनाए मॉडल एक संदेश दे गए—विज्ञान की बड़ी उड़ान की शुरुआत अक्सर एक छोटे से विचार से होती है। सही मार्गदर्शन और प्रयोग का अवसर मिले, तो गांव के स्कूलों से भी भविष्य के वैज्ञानिक निकल सकते हैं।
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