कैलाश सिंह
महराजगंज ( राष्ट्र की परम्परा)। भारत की आत्मा गांवों में बसती है—यह कथन आज भी प्रासंगिक है, लेकिन बदलते समय के साथ गांव और शहर के बीच की दूरी केवल भौगोलिक नहीं रही, बल्कि जीवन-शैली और मूल्यों की खाई भी गहरी होती जा रही है। गांव से शहर की ओर पलायन केवल रोजगार की तलाश नहीं, बल्कि एक ऐसे बदलाव की कहानी है, जहां जीवन के साथ-साथ मानवीय मूल्य भी रूपांतरित हो रहे हैं।
गांवों का जीवन सादगी, सामूहिकता और आत्मीयता से जुड़ा रहा है। वहां रिश्ते खून से ही नहीं, मिट्टी से भी जुड़े होते हैं। सुख-दुःख में पड़ोसी साथ खड़ा होता है, और सामूहिक जिम्मेदारी जीवन का स्वाभाविक हिस्सा होती है। इसके विपरीत शहर का जीवन सुविधाओं से भरा तो है, लेकिन रिश्तों में औपचारिकता और व्यस्तता का बोझ साफ झलकता है। यहां समय है, पर अपनापन नहीं; साधन हैं, पर संतोष नहीं।
शहर की तेज रफ्तार ने व्यक्ति को अवसर तो दिए हैं, लेकिन उसी रफ्तार में संवेदनाएं पीछे छूटती जा रही हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं की होड़ में नैतिकता, सहनशीलता और सामाजिक सरोकार जैसे मूल्य धीरे-धीरे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। गांव से आया व्यक्ति जब शहर में बसता है, तो उसकी प्राथमिकताएं बदलती हैं—संघर्ष के बीच वह परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व में उलझ जाता है।
दूसरी ओर, शहर का प्रभाव अब गांवों तक भी पहुंच चुका है। तकनीक, संचार और बाजारवाद ने देहाती जीवन की सादगी को प्रभावित किया है। संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवार में बदल रहे हैं, लोक-संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाज हाशिये पर जा रहे हैं। गांव भी अब पहले जैसा नहीं रहा, वहां भी शहर की नकल और दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
यह परिवर्तन पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और जागरूकता के विस्तार ने गांवों को नई दिशा दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास की इस दौड़ में हम अपने मूल मानवीय मूल्यों को खोते जा रहे हैं? क्या सुविधा और आधुनिकता के साथ संवेदनशीलता और सामूहिकता को बनाए रखना संभव नहीं है?
समाधान किसी एक को चुनने में नहीं, बल्कि संतुलन में है। शहर की सुविधाएं और गांव की संवेदनाएं—यदि दोनों का समन्वय हो सके, तो समाज अधिक मानवीय और सशक्त बन सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि गांव से शहर तक बदलते जीवन के साथ मूल्यों को टूटने न दिया जाए, बल्कि उन्हें समय के अनुरूप सहेज कर आगे बढ़ाया जाए। तभी विकास वास्तव में समग्र और सार्थक कहा जायेगा।
गोपालगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के Gopalganj में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल…
शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Shahjahanpur में जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासन…
सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा) दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र लोगों…
सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा) जनता क्रान्ति पार्टी (राष्ट्रवादी) के तत्वावधान में वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर मंगलवार को एक भावुक…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के…