डीडीयूजीयू के पत्रकारिता विभाग में परिचर्चा संपन्न
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मीडिया की स्थिति: भविष्य और चुनौतियां” विषय पर एक विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में बीएजेएमसी और एमएजेएमसी के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. राजेश मल्ल के संबोधन से हुई। उन्होंने भारतीय मीडिया की बदलती वैश्विक छवि, फेक न्यूज़ के बढ़ते खतरे, तथ्य-जांच की आवश्यकता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनियंत्रित सामग्री के कारण पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर पड़ रहे प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की नींव सत्य, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर आधारित है, जिसे बनाए रखना हर पत्रकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
परिचर्चा में पत्रकारों की सुरक्षा पर भी गंभीर विमर्श हुआ। विद्यार्थियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। प्रो. मल्ल ने कहा कि पत्रकारिता तभी प्रभावी हो सकती है जब पत्रकार भयमुक्त वातावरण में कार्य कर सकें।
सत्र में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देश, डिजिटल मीडिया नीति, मीडिया पारदर्शिता, संपादकीय जवाबदेही और प्रेस स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने डिजिटल मीडिया के लिए मजबूत नियामक ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया।
परिचर्चा में नंदिनी मिश्रा, कुमार सुधांशु सिंह, मृगांका यादव, मान्सी मिश्रा, पूर्णिमा त्रिपाठी, आतिश कुमार, नेहा यादव, मान्सी दुबे, दीपांश त्रिपाठी, मयंक नाथ त्रिपाठी, प्रिंस सिंह, साक्षी सिंह और योगेश्वर दुबे की सहभागिता उल्लेखनीय रही।
नंदिनी मिश्रा ने मीडिया की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में गिरावट पर चिंता जताई। कुमार सुधांशु सिंह ने डिजिटल मीडिया को पत्रकारिता का भविष्य बताया। मान्सी मिश्रा ने निष्पक्षता को आवश्यक बताते हुए कहा कि विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए वस्तुनिष्ठता अनिवार्य है। दीपांश त्रिपाठी ने फेक न्यूज़ को पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती बताया।
कार्यक्रम का प्रश्नोत्तर सत्र अत्यंत रोचक रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया परिदृश्य, वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर सवाल रखे।
विभाग की ओर से बताया गया कि भविष्य में भी ऐसे संवादात्मक व शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को समसामयिक मीडिया विमर्श तथा शोधपरक पत्रकारिता की दिशा में प्रेरित किया जाता रहेगा।
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