लेख

भीमराव अंबेडकर और आज विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन

डॉ० भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा…

2 years ago

अंबेडकर जयंती विशेष

लोकतांत्रिक भारत हमारा कर्तव्य हमारी जिम्मेवारी जनतंत्र की जान सजग नागरिक और सतत भागीदारी लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं,…

2 years ago

सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये

भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट कटौती, ढांचागत कमी और शिक्षकों…

2 years ago

जयंती का शोर विचारों से ग़ैरहाज़िरी

मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या हाथ में माला, मन में पाखंड बाबा साहब के विचारों—जैसे सामाजिक न्याय, जातिवाद का…

2 years ago

ज्योतिबा फुले क्रांति की मशाल

ज्योतिराव फूले, जिन्होंने समाज को आँखें दीं। धूप थी अज्ञान की, अंधकार था घना,उग आया फूले-सा एक सूर्य अनमना।ज्योति बनी…

2 years ago

प्राइवेट सिस्टम का खेल: आम आदमी की जेब पर हमला

भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार आज निजी संस्थानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुके हैं। प्राइवेट…

2 years ago

नया भारत और फुले का सपना

"ज्योतिबा फुले का भारत बनाना अभी बाकी है" फुले केवल उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे आज…

2 years ago

आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता

एक नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की पुकार विशेष------(राष्ट्र की परम्परा) आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के…

2 years ago

मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं?

"धोखे की खबरें बिकती हैं, लेकिन विश्वास की कहानियाँ दबा दी जाती हैं — क्या हम संतुलन भूल गए हैं?"…

2 years ago

किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे: हैदराबाद के जंगलों की चीख

खजागुड़ा जैसे जंगलों को शहरीकरण के नाम पर नष्ट किया जा रहा है, जिससे न केवल पेड़, बल्कि वन्यजीव और…

2 years ago