लेख

आलेख -अंग्रेजों से आजादी के बाद अब देश को धर्मनिरपेक्ष से आजादी चाहिए तभी देश के हिंदू सुरक्षित रह पाएंगे

पुरे देश एवं दुनिया में पहलगाम में हुए 26 पर्यटकों की हत्या की निंदा हो रही है,पुरे देश के हिन्दुओं…

1 year ago

संघ में इजाजत -न्यौता या जाल!!

आलेख-बादल सरोज इन दिनों अब मुसलमानों पर हेज उमड़ रहा है। आजादी के बाद का सबसे बड़ा “क़ानून बनाकर संपत्ति…

1 year ago

कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार

तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें…

1 year ago

विश्लेषण :

मीडिया में लोक कल्याण और लोक मंगल की भावना डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ आज के वर्तमान परिदृश्य में…

1 year ago

आधी सच्चाई का लाइव तमाशा: रिश्तों की मौत का नया मंच

आजकल लोग निजी झगड़ों और रिश्तों की परेशानियों को सोशल मीडिया पर लाइव आकर सार्वजनिक करने लगे हैं, जहां आधी-अधूरी…

2 years ago

“क्लासरूम से कॉर्पोरेट तक: उच्च शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी”

"डिग्री से दक्षता तक: शिक्षा प्रणाली को उद्योग से जोड़ने की चुनौती" "डिग्री नहीं, दक्षता चाहिए: नई अर्थव्यवस्था की नई…

2 years ago

पानी पेट और पहचान की लड़ाई ग्रामीण महिलाओं पर जलवायु की चोट

जलवायु संकट की चुप्पी में दबी औरतों की पुकार 2025 बीजिंग इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन भारत की ग्रामीण…

2 years ago

गिलहरी और तोता: एक लघु संवाद

वट-वृक्ष की शीतल छाया में,बैठे थे दो प्राणी चुपचाप—एक चंचला चपल गिलहरी,दूजा हरा-पीला तोता आप। थाली में कुछ दाने गिरे…

2 years ago

रंगमंच पर जाति का खेल कितना जायज़?

कला का काम समाज को जागरूक करना है, उसकी विविधताओं को सम्मान देना है, और उस आईने की तरह बनना…

2 years ago

भीमराव अंबेडकर और आज विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन

डॉ० भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा…

2 years ago