धरती की धड़कन पहले से कहीं तेज़ हो चुकी है। सूखी नदियों में चौड़ी होती दरारें, जंगलों का सिकुड़ता घेरा और शहरों में जहरीली होती हवा अब केवल प्रकृति की समस्या नहीं—यह सीधे-सीधे आने वाली पीढ़ी के सपनों पर असर डाल रही है। छात्र, जो देश के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण नींव हैं, आज सिर्फ किताबों का बोझ नहीं बल्कि बिगड़ते पर्यावरण का दबाव भी झेल रहे हैं।
गर्म होती धरती उनके पढ़ने के माहौल को बदल रही है। बढ़ता तापमान ध्यान में बाधा डालता है, प्रदूषित हवा फेफड़ों के साथ उनकी कल्पनाओं को भी चोट पहुँचाती है। ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या बदलते पर्यावरण के बीच छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा?
लेकिन आशा वहीं जन्म लेती है जहाँ चुनौतियाँ सबसे बड़ी होती हैं। प्रकृति हमें पुकार रही है—पढ़ाई और पर्यावरण दोनों को संतुलित करने के लिए। यहाँ छात्रों, अभिभावकों और सरकार—सभी के लिए कुछ ऐसे उदाहरण दिए जा रहे हैं, जो बदलाव को आसान और सफल बना सकते हैं।
🌱 10 आसान और व्यावहारिक उदाहरण जो छात्र, स्कूल और समाज तुरंत अपना सकते हैं
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