अभियान,सामुदायिक कार्यक्रम व चर्चाएं आयोजित कर पीड़ितों में जागरूकता लाएं

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 17 नवंबर 2024 पर विशेष-शैक्षिक

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियाँ का हर देश इस आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकी युगमें भी अनेक प्रकार की बीमारियों रोगों से ग्रस्त है, क्योंकि अभी भी कुछ ऐसी बीमारियां व रोग हैं जो लाइलाज हैं, हालांकि उन पर नियंत्रण के लिए सटीक उपचारों का शोध निरंतर जारी है, परंतु इस बीच कोविड-19 जैसे संक्रमण रोग व उनके विभिन्न वेरिएंट आ जाते हैं जिससे पूरे विश्व में लाखों लोगों की जान चली जाती है, जिसका सटीक उदाहरण हमने कोविड-19 महामारी में देखें।अभी कैंसर जैसी बीमारी का तीव्रता से विस्तार हो रहा है, इसलिए उपचार के साथसाथ अब यह अत्यंत जरूरी हो गया है कि उन बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए उनके जीवन शैली परिवर्तन विकारों को त्यागना का उनमें जन जागरण बढ़ाना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज हम इस जागरूकता की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 17नवंबर 2024 को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस है, जिसमें हम शैक्षिक अभियान, सामूहिक कार्यक्रम व चर्चाएं आयोजित कर पीड़ितों में जन जागृत उत्पन्न करते हैं।बता दें,सबसे पहले यह माना जाता है की यह एक संक्रामक बीमारी है जिस कारण मरीज की कोई सहायता करने से भी डरता है लेकिन यह एक असंक्रामक बीमारी है और हमारे अंदर नहीं फैल सकती है। दूसरी अफवाह यह है की अगर किसी को दौरे पड़ रहे हैं तो उसे भूत प्रेत और जादू टोने से जोड़ दिया जाता है जो पूरी तरह से झूठ है। मिर्गी के मरीज को जूता सुंघाना, उसके मुंह में चम्मच डालना भी आधार रहित बातें हैँ,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, किसी भी रोग के उपचार के साथ जीवन शैली में परिवर्तन, रोग को बढ़ावा देने वाले कारकों से बचना व सुरक्षा उपायों के पालन में जागरूकता एक सटीक अस्त्र है। बता दें इस आर्टिकल मैं बताई गई बातों की सटीकता का कोई प्रमाण नहीं है। 

साथियों बात अगर हम राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 17 नवंबर 2024 की करें तो,भारत में हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है, जो मिर्गी के बारे में अधिक समझ औरजागरूकता की आवश्यकता के एक शक्तिशाली अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है,एकन्यूरोलॉजिकल विकार जो दुनियाँ भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। इस दिन का उद्देश्य मिर्गी से पीड़ित लोगों को सहायता प्रदान करना, लोगों को शिक्षित करना और इस स्थिति से जुड़े कलंक को कम करना है। उचित जागरूकता और उपचार के साथ, मिर्गी को अक्सर प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है, जिससे लोग संतुष्ट जीवन जी सकते।मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जो मस्तिष्क में अचानक विद्युत गतिविधि के फटने के कारण बार-बार, बिना किसी कारण के दौरे पड़ने से चिह्नित होता है। ये दौरे प्रकार और तीव्रता में भिन्न हो सकते हैं, जागरूकता में संक्षिप्त चूक से लेकर तीव्र ऐंठन तक, और शारीरिक, भावनात्मक या व्यवहार संबंधी लक्षणों के साथ हो सकते हैं। सभी उम्र, लिंग और पृष्ठभूमि के लोग मिर्गी से प्रभावित हो सकते हैं, और इस स्थिति के लिए अक्सर आजीवन प्रबंधन कीआवश्यकता होती है। 

साथियों बात अगर हम मिर्गी दिवस के लक्ष्य और उद्देश्यों की करें तो,राष्ट्रीय मिर्गी दिवस का लक्ष्य न केवल जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि लोगों को समय पर निदान और उपचार प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना, जनता को शिक्षित करना और मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अधिक समावेशी समाज का निर्माण करना भी है।मिर्गी से पीड़ित लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में जागरूकता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर, लोगों को इस स्थिति के बारे में जानकारी देने, कलंक को कम करने और कार्रवाई के लिए प्रेरित करने के लिए शैक्षिक अभियान, सामुदायिक कार्यक्रम और चर्चाएँ आयोजित की जाती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और वकालत समूह इस दिन का उपयोग रोगियों की कहानियाँ साझा करने, अंतर्दृष्टि प्रदान करने और मिर्गी के प्रभावों और प्रबंधन रणनीतियों के बारे में जनता को शिक्षित करने के लिए करते हैं।जागरूकता बढ़ाने से उपचार की उपलब्धता में अंतर को पाटने में भी मदद मिल सकती है,खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जहां स्वास्थ्य सेवा की पहुंच सीमित हो सकती है।जागरूकता बढ़ाकर, राष्ट्रीय मिर्गी दिवस एक अधिक सूचित और दयालुसमाज बनाने में मदद करता है। 

साथियों बात अगर हम मिर्गी के भारत और वैश्विक प्रभाव की करें तो,मिर्गी वैश्विक आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से को प्रभावित करती है, कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा और उपचार तक सीमित पहुंच के कारण इसकी दर विशेष रूप से उच्च है।यहाँ कुछ प्रमुख आँकड़े दिए गए हैंवैश्विक प्रभाव-2018 के एक अध्ययन के अनुसार, दुनियाँ भर में 7 करोड़ से ज़्यादा लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। इसमें सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हैं, हालाँकि कम और मध्यम आय वाले देशों में इसका प्रचलन अक्सर ज़्यादा होता है।भारतीय संदर्भ-अकेले भारत में ही लगभग 1.2 करोड़ लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। यह वैश्विक मिर्गी के बोझ का एक बड़ा हिस्सा है और देश में जागरूकता और सहायता के महत्व को दर्शाता है।वैश्विक स्तरपर, मिर्गी का प्रचलन प्रति 1,000 लोगों पर लगभग 5-9 मामलों का अनुमान है। हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में, ये दरें और भी अधिक हो सकती हैं।2010 के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) विश्लेषण के अनुसार, मिर्गी वैश्विक बीमारी के बोझ का लगभग 0.7 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि हर साल 1.7 करोड़ से ज़्यादा विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाई) का नुकसान होता है।भारत में बच्चे-भारत में मिर्गी 8-12 वर्ष की आयु के बच्चों में विशेष रूप से प्रचलित है, पाँच साल की व्यापकता दर प्रति 1,000 बच्चों में 22.2 है। यह युवा व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए निदान, उपचार और सहायता तक बेहतर पहुँच की आवश्यकता को रेखांकित करता है। 

साथियों बात अगर हम मिर्गी प्रबंधन की करें तोउपचार के विकल्प-चिकित्सा अनुसंधान में प्रगति के कारण, मिर्गी को अक्सर उपचार के साथ प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। मिर्गी के प्रबंधन के लिए कुछ सामान्य दृष्टिकोण इस प्रकार हैं,दवा- मिर्गी के इलाज के लिए एंटीएपिलेप्टिक दवाएँ सबसे आम तरीका है। ये दवाएँ लगभग 70 प्रतिशत रोगियों में दौरे को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। एक बार निदान हो जाने के बाद, डॉक्टर दौरे के प्रकार और आवृत्ति के आधार पर ये लिखते हैं। खुराक और किसी भी संभावित दुष्प्रभाव की निगरानी के लिए नियमित अनुवर्ती कार्रवाई आवश्यक है।सर्जिकल हस्तक्षेप-कुछ लोगों के लिए जो दवा से ठीक नहीं होते, सर्जिकल हस्तक्षेप एक विकल्प हो सकता है। सर्जरी में आमतौर पर दौरे के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के हिस्से को हटाना या बदलना शामिल होता है। हालाँकि, मिर्गी से पीड़ित लोगों में से केवल कुछ प्रतिशत को ही इस प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।आहार चिकित्सा-कुछ मामलों में, आहार परिवर्तन, जैसे कि कीटोजेनिक आहार, ने दौरे की आवृत्ति को कम करने में आशा जनक परिणाम दिखाए हैं, खासकर बच्चों में। की टोजेनिक आहार में वसा अधिक और कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जो मिर्गी से पीड़ित कुछ व्यक्तियों में मस्तिष्क के कार्य को स्थिर करने में मदद कर सकता हैजीवनशैली में बदलाव-मिर्गी के प्रबंधन के लिए अक्सर जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की आवश्यकता होती है, जैसे कि दौरे को बढ़ावा देने वाले ज्ञात कारणों (जैसे नींद की कमी या तनाव) से बचना, मेडिकल अलर्ट ब्रेसलेट पहनना, और गतिविधियों के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन करना।मनोवैज्ञानिक सहायता-मिर्गी के साथ जीने से भावनात्मक तनाव, चिंता और यहां तक ​​कि अवसाद भी हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से सहायता, परामर्श या सहायता समूहों में शामिल होने से भावनात्मक कल्याण और जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक अंतर आ सकता है। 

साथियों बात अगर हम मिर्गी को समझने की करें तो,मिर्गी दिमाग से जुड़ी एक स्थिति होती है और यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे बच्चों का दिमाग अच्छे से विकसित न हो पाना, बड़ों में दिमाग पर गहरी चोट लग जाना या फिर ट्यूमर आदि होना, दिमागी बुखार होना या गांठ होना भी इसके कारणों में शामिल है। जिस रूप में हमारा नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है वह मिर्गी आने का कारण बन सकता है। अगर आपके दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम मात्रा में पहुंचती है तो भी व्यक्ति को दौरे पड़ सकते हैं।शुरुआत में मिर्गी के लक्षणों के बारे में हमको जान लेना चाहिए, ताकि व्यक्ति या उसके आस पास के लोग एकदम से घबरा न सकें। शुरू में व्यक्ति के हाथ पैरों में झटके आ सकते हैं, चेहरे और गर्दन की मांसपेशियों में भी झटके आने लगते हैं। व्यक्ति अचानक खड़े खड़े गिर सकता है और टेंपररी रूप से झटके आ सकते हैं। कुछ समय के लिए कुछ भी याद न रहना, मुंह से झाग निकलना, चक्कर आना या फिरझनझनाहट आना आदि इसके लक्षणों में शामिल होते हैं। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 17 नवंबर 2024 पर विशेष-शैक्षिक अभियान,सामुदायिक कार्यक्रम व चर्चाएं आयोजित कर पीड़ितों में जागरूकता लाएं।मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों के जीवन को बेहतर बनाने में जागरूकता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।किसी भी रोग के उपचार के साथ,जीवन शैली मेंपरिवर्तन रोग को बढ़ावा देने वाले कारकों से बचाना, सुरक्षा उपायों के पालन में जागरूकता सटीक अस्त्र हैँ।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि

Editor CP pandey

Recent Posts

साइबर सेल की तत्परता से ठगी की रकम वापस, पीड़ित को मिली राहत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना श्यामदेंउरवा क्षेत्र में साइबर ठगी के एक मामले…

5 hours ago

मेला देखने गए युवक पर चाकू से हमला करने वाला आरोपी 24 घंटे में गिरफ्तार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना पनियरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लक्ष्मीपुर में बाकी माता…

5 hours ago

अहिरौली तिवारी महोत्सव 2026 का भव्य समापन, ग्रामीण प्रतिभाओं ने बिखेरा हुनर का जलवा

संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के अहिरौली तिवारी गांव…

5 hours ago

एक साथ 201 बटुकों का उपनयन संस्कार, वैदिक परंपरा का भव्य आयोजन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। ब्राह्मण विकास परिषद के तत्वावधान में आयोजित भव्य यज्ञोपवीत कार्यक्रम में…

6 hours ago

महायोगी गुरु गोरखनाथ ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब का शुभारंभ, छात्रों को मिला हाईटेक प्रशिक्षण का नया मंच

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी…

6 hours ago

भजन और भक्ति के जरिए ईश्वर को पाया जा सकता है: चारु चौधरी

साहित्यकार समाज का आईना होता है: महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरी गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। अपना…

6 hours ago