“भिवानी की बेटी मनीषा को मिलेगा न्याय” – सीबीआई को सौंपा जाएगा मामला, जनाक्रोश के आगे झुकी सरकार

भिवानी।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) हरियाणा की 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जनाक्रोश, आंसुओं और इंसाफ की मांगों के बीच अब राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को घोषणा की कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी, ताकि हर पहलू की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो सके।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा –👉 “भिवानी की हमारी बेटी मनीषा और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी गंभीरता और पारदर्शिता से काम कर रहे हैं। परिवार की मांग पर इस मामले को सीबीआई को सौंपा जा रहा है। न्याय अवश्य होगा।”

🌸 कैसे लापता हुई थी मनीषा? 11 अगस्त को मनीषा स्कूल से छुट्टी के बाद एक नर्सिंग कॉलेज में दाखिले के बारे में जानकारी लेने गई थी। लेकिन इसके बाद वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने हर जगह तलाश की, पर बेटी का कोई सुराग नहीं मिला। दो दिन बाद, 13 अगस्त को उसका शव भिवानी के एक खेत से बरामद हुआ। मासूम उम्र की इस शिक्षिका की मौत की खबर से न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके में मातम छा गया।

📱 जनाक्रोश और प्रशासन की सख्ती मामले ने तेजी से तूल पकड़ा और भिवानी समेत चरखी दादरी जिले में गुस्सा उबाल मारने लगा। हजारों लोग सड़क पर उतर आए और न्याय की मांग की। हालात बिगड़ते देख सरकार को मंगलवार को 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट, बल्क एसएमएस और डोंगल सेवाएं निलंबित करनी पड़ीं। यह आदेश मंगलवार सुबह 11 बजे से लागू हुआ।

💔 ‘हमारी बेटी, हमारा दर्द’ मनीषा की मौत ने हरियाणा में बेटियों की सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह सिर्फ एक ही मांग गूंज रही है – “मनीषा को इंसाफ दो।”

परिजन लगातार इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि पुलिस की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है, और असली दोषियों को तभी सजा मिलेगी जब देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी इस मामले की पड़ताल करेगी।

🕯️ न्याय की राह पर एक कदम आगे जनता के आक्रोश और परिवार की पीड़ा के आगे आखिरकार सरकार झुकी। मुख्यमंत्री सैनी ने साफ किया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। यह घोषणा मनीषा के परिवार और उन सभी लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्होंने इंसाफ की लड़ाई को अपना आंदोलन बना लिया है।


👉 यह कहानी सिर्फ एक बेटी की नहीं है, बल्कि हर उस मां-बाप के दर्द की है जिनकी बेटियां शिक्षा और सपनों की राह पर निकलती हैं। सवाल साफ है – क्या अब बेटियां सुरक्षित लौटेंगी?

Editor CP pandey

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