बाढ़ सूखा आगजनी इत्यादि से रहता है प्रभावित
भागलपुर देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विकासखंड भागलपुर का यह गांव जो देवरिया से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण दिशा में अन्तिम छोर पर सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है। मानो इस गांव को प्राकृतिक आपदाएं विरासत में मिली हैं।
भागलपुर बाढ़ प्रभावित इलाका है। यह इलाका हर साल बाढ़ और सुख से प्रभावित होता रहता है। इसके इलाके में मुख्य रूप से दो ही फासले होती हैं। गेहूं और धन धान की फसलों को सुख मार देती है। गेहूं की फसलों को जब पकने के बाद कटाई का समय आता है। तो कहीं शॉर्ट सर्किट से आग लगती है। तो कहीं माचिस की तीलियों से, थ्रेसर, कंबाइन से इतनी सारी आपदाएं झेलता हुआ।
यह भागलपुर सन 98 की बाढ़ का गवाह है। भागलपुर और उसके आसपास बहुत से गांव में बाढ़ के द्वारा पानी भर जाने से आवागमन ठप हुआ। लोगों का पलायन सब हो गया था। फिर भी समय रहते तटबंधों का यहां की सरकार द्वारा या प्रशासन द्वारा कार्य नहीं हो पता है। जबकि आज भी नदियों का कटान स्तर बहुत ही भयानक रूप लेते जा रहा है। सरकार द्वारा जगह-जगह पत्थर के बोल्डर द्वारा पानी की धारा को कम करने और रोकने के लिए जगह-जगह ठोकर बनाए गए हैं। फिर भी काटन की स्थिति क्योंकि त्यों बनी हुई है।
नदियों का जलस्तर कम हो जाने पर वही लोग रेत के मैदानों में खरबूज, तरबूज, खीरा, काकर ,सब्जी इत्यादि उगा कर अपनी जीविका पालन करते हैं। या यूं कहे कि वह रेता में सोना उगते हैं। जब उनकी फसल तैयार होती है। तो फिर पानी का स्तर बढ़ना शुरू हो जाता है। जिसमें उनकी आधी फसल नष्ट हो जाती है। चुनावी समय पर माननियो का आना-जाना शुरू हो जाता है। लेकिन विकास के नाम पर भागलपुर का कभी विकास नहीं हुआ। यहां कार्तिक पूर्णिमा का मेला लगता है। दूरराज से लोग आते हैं। छठ पूजन में भी लोग आते हैं। लेकिन घाट न होने के कारण, बाढ़ द्वारा काटन होने के कारण इन सभी आयोजनों में काफी लोगों को दिक्कत आती है। आज तक बरसों से विरासत में मिली इन आपदाओं से भागलपुर अपने आप को कभी झुकने नहीं दिया। आज भी इन प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है।
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