सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) । सूर्य देवता जब धनु राशि मे पहुंचते हैं तो धनु की संक्रांति होती है।इसी समय से खरमास का प्रारंभ होता है।इसके पश्चात जब मकर संक्रांति लगता है खरमास समाप्त हो जाता है।उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि इस महीने में भगवान के पूजन का विशेष महत्व होता है ,इस दौरान भगवान को मीठे खीर का भोग लगाया जाता है। 16 दिसम्बर के बाद अगले साल 15 जनवरी को एक महीने के बाद पुनः मकर संक्रांति से मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। खरमास मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि को रात्रि 1 बजकर 26 मिनट पर धनु राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ शुरू हो जायेगा ,यह सूर्य के 15 जनवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश के साथ समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएगा।मांगलिक कार्य के लिए तीन ग्रहों वृहस्पति,सूर्य और चंद्रमा के बल की आवश्यकता होती है, इसमें से एक भी ग्रह की हीनता होती है तो मांगलिक कार्य नही होते हैं।इस महीने में बृहस्पति ग्रह के कमजोर होने के कारण यह स्थिति बनती है।
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