यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन शुरू, 37 वोट का कोटा; BJP-NDA और SP-कांग्रेस के बीच सियासी गणित पर नजर
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया मंगलवार, 29 सितंबर से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 16 अक्टूबर को मतदान होगा। इसके साथ ही राजधानी लखनऊ में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रमुख दल उम्मीदवारों के चयन और विधायकों के संख्या बल के हिसाब से रणनीति बनाने में जुटे हैं।
राज्यसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा 397 सदस्यों के आधार पर एक सीट के लिए 37 मतों का कोटा बनता है। यही वजह है कि इस बार चुनाव का सबसे अहम पहलू सीटों का गणित और शेष मतों का प्रबंधन माना जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में विधायक मतदान करते हैं और प्रक्रिया आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत होती है।
सपा ने विधायकों को लखनऊ में रहने के दिए निर्देश
राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने विधायकों को लखनऊ में रहने के निर्देश दिए हैं। पार्टी स्तर पर उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर मंथन जारी है। दूसरी ओर, भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में भी राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई है और पार्टी की ओर से जल्द प्रत्याशियों की घोषणा किए जाने की संभावना है।
मौजूदा विधानसभा संख्या बल के अनुसार भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के पास करीब 294 विधायक बताए जा रहे हैं। इस संख्या के आधार पर NDA सात सीटों के लिए जरूरी 259 मत आसानी से जुटा सकता है। सात सीटों के बाद 35 मत बचते हैं, यानी आठवीं सीट के लिए 37 के आंकड़े तक पहुंचने में दो अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी। ऐसे में आठवीं सीट के लिए सहयोगी दलों के अतिरिक्त समर्थन और मतदान के दौरान बनने वाले समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास मिलाकर करीब 103 विधायक बताए जा रहे हैं। इस संख्या से दो सीटों के लिए जरूरी 74 मत पूरे होते हैं और 29 मत शेष रहते हैं। तीसरी सीट के लिए 37 मतों की जरूरत होने के कारण आठ अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में तीसरी सीट का समीकरण अतिरिक्त समर्थन, उम्मीदवारों की संख्या और प्राथमिकता वाले मतों पर निर्भर करेगा।
10 सीटों पर बदलेंगे राज्यसभा के समीकरण
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें भाजपा के दिनेश शर्मा, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बनवारी लाल वर्मा, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य शामिल हैं। समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम का कार्यकाल भी इसी अवधि में पूरा हो रहा है।
खास बात यह है कि विधानसभा में बसपा का मौजूदा प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व बना रहेगा या नहीं, यह भी चुनावी समीकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
16 अक्टूबर को होगा फैसला
निर्वाचन कार्यक्रम के मुताबिक 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना भी होगी।
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले इन राज्यसभा चुनावों ने राजनीतिक दलों के सामने संख्या बल के साथ-साथ उम्मीदवार चयन और रणनीतिक प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा-नीत NDA और विपक्षी दल किन चेहरों को मैदान में उतारते हैं और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुकाबले का वास्तविक स्वरूप क्या बनता है।
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