24 साल की उम्र में अमर हो गए आज़ाद: जानें पूरी गाथा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, चंद्रशेखर आज़ाद का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में उन्होंने अपने संकल्प को निभाते हुए अंतिम गोली स्वयं को मार ली, ताकि वे अंग्रेजों के हाथों जीवित न पकड़े जाएं। यह घटना केवल एक शहादत नहीं थी, बल्कि उस अदम्य साहस की मिसाल थी जिसने युवाओं की पीढ़ियों को प्रेरित किया।
आज चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत को याद करना, उनके विचारों और त्याग को समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव (वर्तमान अलीराजपुर जिला) में हुआ था। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी और माता जगरानी देवी थे। बचपन से ही उनमें साहस और देशभक्ति की भावना प्रबल थी।
महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (1921) में भाग लेने के दौरान उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया। जब अदालत में उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा – “नाम: आज़ाद, पिता का नाम: स्वतंत्रता, पता: जेल।” तभी से वे चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

ये भी पढ़ें – 27 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ – आज का इतिहास

क्रांतिकारी संगठन और नेतृत्व
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)
रामप्रसाद बिस्मिल और अन्य क्रांतिकारियों द्वारा स्थापित संगठन HRA का उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना था। बाद में चंद्रशेखर आज़ाद ने इस संगठन को पुनर्गठित किया।
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)
1928 में संगठन का नाम बदलकर HSRA कर दिया गया। इस संगठन में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे युवा क्रांतिकारी शामिल थे।
चंद्रशेखर आज़ाद इसके प्रमुख नेता बने और उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व किया।
काकोरी कांड और सांडर्स हत्याकांड
काकोरी ट्रेन डकैती (1925)
9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन पर ट्रेन से सरकारी खजाना लूटने की घटना ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया। इस योजना में चंद्रशेखर आज़ाद की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
सांडर्स हत्याकांड (1928)
लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए लाहौर में ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स की हत्या की गई। इस कार्रवाई में भगत सिंह और राजगुरु के साथ चंद्रशेखर आज़ाद ने रणनीतिक भूमिका निभाई।

ये भी पढ़ें – 27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति: भारतीय राजनीति, साहित्य और सिनेमा की महान हस्तियां

27 फरवरी 1931: शहादत का दिन
27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में पुलिस ने उन्हें घेर लिया। कहा जाता है कि किसी मुखबिर ने सूचना दी थी। कई घंटों तक मुठभेड़ चली।
जब उनके पास केवल एक गोली बची, तो उन्होंने अपने संकल्प को निभाते हुए स्वयं को गोली मार ली।
आज वही स्थान अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है।
प्रतिज्ञा और व्यक्तित्व
चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रण लिया था कि वे कभी अंग्रेजों के हाथों जीवित नहीं पकड़े जाएंगे। उनका यह संकल्प उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता को दर्शाता है।
वे अनुशासनप्रिय, साहसी और संगठन क्षमता से परिपूर्ण थे।

ये भी पढ़ें – इतिहास का भावुक दिन: 27 फ़रवरी को हुए निधन की गाथा

विचारधारा और प्रेरणा
उनकी विचारधारा केवल सशस्त्र क्रांति तक सीमित नहीं थी। वे समाजवादी सोच रखते थे और एक समानता आधारित भारत का सपना देखते थे।
HSRA के घोषणापत्र में स्पष्ट था कि उनका लक्ष्य केवल अंग्रेजों को हटाना नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना था।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज भी चंद्रशेखर आज़ाद युवाओं के लिए साहस और देशभक्ति की मिसाल हैं।
उनका जीवन सिखाता है:
अन्याय के खिलाफ खड़े होना
अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहना
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना

ये भी पढ़ें – बिजोलिया आंदोलन के नायक और स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रदूत

ऐतिहासिक महत्व
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में चंद्रशेखर आज़ाद की भूमिका निर्णायक रही।
उनकी शहादत के बाद क्रांतिकारी आंदोलन और तेज हुआ।
भगत सिंह और उनके साथियों के मुकदमे ने पूरे देश में क्रांति की लहर पैदा कर दी।
चंद्रशेखर आज़ाद का बलिदान भारतीय इतिहास की अमर गाथा है। 27 फरवरी 1931 का दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता कितने संघर्ष और बलिदानों से मिली है।
आज जरूरत है कि हम उनके आदर्शों को आत्मसात करें और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

Editor CP pandey

Recent Posts

सेहत और स्वाद का संगम: होली पर घर में बनाएं मूंग दाल बाफरी

होली स्पेशल रेसिपी: घर पर बनाएं स्वादिष्ट मूंग दाल बाफरी, पारंपरिक स्वाद के साथ सेहत…

1 minute ago

बिजोलिया आंदोलन के नायक और स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रदूत

विजय सिंह पथिक, बिजोलिया आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम, राजस्थान किसान आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास…

29 minutes ago

इतिहास का भावुक दिन: 27 फ़रवरी को हुए निधन की गाथा

भारत और विश्व इतिहास में 27 फ़रवरी को हुए निधन कई ऐसी महान विभूतियों से…

53 minutes ago

सत्ता के ‘कवच’ में कातिल मुस्कान: 72 घंटे बाद भी BSA पर शासन मेहरबान?

क्या कद्दावर मंत्री के रसूख तले दब गई शिक्षक की 'आखरी चीख'? Bsa शालिनी श्रीवास्तव…

1 hour ago

27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति: भारतीय राजनीति, साहित्य और सिनेमा की महान हस्तियां

27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति भारतीय इतिहास, राजनीति, साहित्य और सिनेमा में अपना अमिट…

2 hours ago

राशिफल: जानें मेष से मीन तक किसे होगा लाभ, किसे रहना होगा सावधान

27 फरवरी 2026 राशिफल के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी…

2 hours ago