✍️ डाॅ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
जीत–हार का तजुर्बा अजीब होता है,
जीत पर सारी दुनिया गले लगाती है,
हार के बाद तो नज़दीक नहीं आती,
बल्कि अनावश्यक मुँह चिढ़ाती है।
असफलता पर कोई साथ खड़ा हो,
कंधे पर प्यार भरा हाथ रखा हो,
वही तो एक सच्चा मित्र होता है,
अन्यथा तो स्वार्थ का साथ होता है।
संत से पूछिए क्रोध क्या होता है,
उसका उत्तर होगा—यह वह दंड है,
जो दूसरों की गलती पर भी,
मनुष्य स्वयं को ही देता है।
हम बड़ा होने का प्रयत्न करते हैं,
पर अक्सर यह भूल जाते हैं,
जिसने हमको बड़ा बनाया है,
हम उससे बड़े कैसे हो सकते हैं।
स्वार्थपरता का पता तो तब चलता है,
जब किसी के नज़दीक जाया जाता है,
स्वार्थहीन इंसान तो दूर रहकर भी,
अपनेपन का एहसास करा जाता है।
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) क्षेत्र…
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। महीनों के इंतज़ार के बाद फिल्म रामायण का टीजर हनुमान जयंती…
नई दिल्ली/कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव…
IPL 2026 के मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक…
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर विकास विभाग के नॉलेज पार्टनर जनाग्रह के सहयोग से नगरीय…