ट्रंप के टैरिफ फैसले पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी, बोले – “यह कूटनीति नहीं, विदूषक की धौंस है”


भारतीय निर्यात, छोटे व्यापार और नौकरियों को बताया नुकसानदेह

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा) एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने इस निर्णय को “वैश्विक व्यापार की समझ से परे, प्रमुख विदूषक की धौंस” करार दिया है।

ओवैसी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा,“ट्रंप ने भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया है, सिर्फ इसलिए क्योंकि भारत ने रूस से तेल खरीदा। यह कूटनीति नहीं, बल्कि एक प्रमुख विदूषक की धौंस है, जो वैश्विक व्यापार को समझने में असफल हैं।”

छोटे कारोबार और नौकरियों पर असर की चेतावनी ओवैसी ने इस कदम को भारतीय निर्यातकों, छोटे कारोबारियों और रोजगार के लिए खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कठोर टैरिफ फैसलों से भारत जैसे विकासशील देशों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करना और कठिन हो जाएगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी राष्ट्र के संप्रभु निर्णयों—जैसे ऊर्जा स्रोतों के चयन—के लिए उसे आर्थिक दंड देना न्यायसंगत है?

ट्रंप का टैरिफ फैसला क्यों आया? बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन का यह कदम रूस से भारत द्वारा तेल खरीदने के विरोध में आया है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, और वे चाहते हैं कि अन्य देश रूस के साथ व्यापारिक संबंध सीमित करें।

ट्रंप प्रशासन की यह नीति स्पष्ट रूप से भारत को उसके रणनीतिक फैसलों के लिए आर्थिक दबाव में लाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

ट्रंप पर ओवैसी का सीधा हमला ओवैसी के बयान में ट्रंप के लिए ‘प्रमुख विदूषक’ (chief clown) जैसे शब्दों का प्रयोग यह दर्शाता है कि वे इस कदम को कितनी तीव्रता से आलोचनात्मक दृष्टि से देख रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब ओवैसी ने अमेरिकी विदेश नीति को लेकर मुखर रुख अपनाया हो।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस टैरिफ वृद्धि पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ प्रभावी रहता है, तो कई भारतीय उद्योगों को बड़ा झटका लग सकता है, खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों को।

Editor CP pandey

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