राहुल गांधी का PM मोदी और RSS पर तीखा हमला
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए विपक्ष की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन संविधान की रक्षा और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किए गए अपने संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी खेमे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और विपक्ष अपने रुख से पीछे हटने वाला नहीं है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा कि यदि सरकार चाहे तो सभी नेताओं और युवाओं को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन इससे विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष चारों ओर से सरकार को घेर रहा है और अपने अभियान को बीच में छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। राहुल ने यह भी दावा किया कि जिन मुद्दों पर विपक्ष जवाब मांग रहा है, उनसे जुड़ी जानकारी उसके पास पहले से मौजूद है। हालांकि, उन्होंने अपने संदेश में इस जानकारी का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। कांग्रेस नेता ने संविधान की रक्षा को अपनी लड़ाई का प्रमुख उद्देश्य बताते हुए कहा कि देश की जनता की आवाज को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने पिछले 10 से 15 वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष ऐसा माहौल दोबारा बनने से रोकने के लिए संघर्ष करेगा। राहुल गांधी ने युवाओं को संबोधित करते हुए उनसे विरोध जारी रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार और संविधान पर हमला करने वालों को राजनीतिक रूप से पराजित करने के लिए विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा। राहुल गांधी की ये टिप्पणियां ऐसे समय सामने आई हैं, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन प्रदर्शनों में मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष इन मुद्दों पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर जवाब मांग रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विवाद ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ विपक्ष इन मामलों को लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा से जोड़ रहा है, तो दूसरी तरफ इन आरोपों और दावों पर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में राहुल गांधी का यह बयान केवल सरकार पर हमला नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक लामबंदी का संकेत भी माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मतदाता सूची और SIR को लेकर जारी विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार तथा चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल राहुल गांधी के बयान ने सियासी माहौल में नई गर्मी ला दी है और संविधान, चुनावी पारदर्शिता तथा युवाओं की भागीदारी को लेकर बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।
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