रेलकर्मियों को बोनस की घोषणा महज एक छलावा

  • न्यूनतम वेतन 7000 को आधार मानकर की गई है घोषणा
  • सातवें वेतन आयोग में निर्धारित है 18000 रुपये मूल वेतन
  • दिहाड़ी मजदूर के वेतन के बराबर भी नहीं है आधार वेतन

राजापाकड़/कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा )14 अक्टुबर..

भारत सरकार के प्रवक्ता के रूप में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि रेल कर्मचारियों को 78 दिन के उत्पादकता के आधार पर 17900 रुपये के लगभग बोनस देने का निर्णय केन्द्रीय मंत्रिमंडल की कैबिनेट की बैठक में लिया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) के महामंत्री विनोद राय ने इस घोषणा को छलावा बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला विरोधाभासी है। क्यों कि घोषणा से तो यह लगता है, कि रेल कर्मचारियों को लगभग ढाई माह के वेतन के बराबर रकम बोनस के रूप में मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है क्यों कि बोनस की जो गणना भारत सरकार ने किया है, उसका आधार न्यूनतम वेतन को ₹ 7000 मान कर की गई है। यह कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी और धोखाधड़ी है। 7 वें वेतनमान में रेल कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹ 18000 निर्धारित किया गया है लेकिन बोनस यह आधार पर नहीं है। बोनस की गणना दिहाड़ी मजदूरी करने वाले मजदूरों को दिए जाने वाले न्यूनतम मासिक मजदूरी से भी कम पर की जाती है। यह कर्मचारियों के साथ भद्दा मजाक है , इससे अधिक तो हर माह रेलवे के अधिकारियों को चाय पान के लिए इम्प्रेस्ड धन आवंटित किया जा रहा है।
भारत की सरकार बोनस को हक नहीं कृपा मानती है।
मोदी सरकार ने मजदूर आंदोलन को कमजोर करने के लिए असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पांच किलो राशन देकर ऐसा लुभाया , कि वो बुनियादी सवालों से दूर हो गए और उन्हें लगने लगा है कि जब बिना किसी मेहनत मशक्कत के हमे सरकारी सुविधाएं मिल रहीं हैं, तो फिर हम सड़कों की खाक क्यों छानें और हम उन्हें यह समझाने में विफल रहे कि यह पूंजी परस्त सरकार तुम्हें किसान से मजदूर और मजदूर से भिखारी बना रही। संयुक्त महामंत्री अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारियों को अब लगने लगा है कि रेलवे के मजदूर आंदोलन को सरकार ने बौना बना दिया है और इसीलिए रेलवे में नौकरशाही बेलगाम हो रही है, जिसका खामियाजा रेल के मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। मजदूर आंदोलन की निष्क्रिय होती परिस्थितियों को नियंत्रित करने में यदि हम लोग विफल हुए तो, भारत में मजदूर आंदोलन खत्म होने के अपराधी करार दिए जाएंगे। इसलिए “हक चाहिए तो छीन लो हकदार की तरह।”
संघ के अध्यक्ष माधव प्रसाद शर्मा, देवेंद्र प्रताप यादव, मनोज द्विवेदी रामकृपाल शर्मा, राजेंद्र प्रसाद भट्ट, केडी के तिवारी आदि तमाम पदाधिकारियों ने कहा कि रेल कर्मचारी दिन रात मेहनत करके रेल को आगे बढ़ाने का काम करते हैं इस नाते सही बोनस लाभ मिलना ही चाहिए।

संवाददाता कुशीनगर…

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