पाकिस्तान से आया भारत के समर्थन में ओपन लेटर, बलोच नेता मीर यार बलोच ने कहा – ‘आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंको’

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान से भारत के समर्थन में एक बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के वरिष्ठ नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर भारत सरकार और 140 करोड़ भारतीयों को नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं दी हैं। इस पत्र में उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, बलूचिस्तान की आज़ादी, भारत-बलूचिस्तान ऐतिहासिक रिश्तों और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र

मीर यार बलोच ने पत्र में कहा कि बलूचिस्तान और भारत के संबंध सदियों पुराने हैं, जिनकी जड़ें संस्कृति, व्यापार, कूटनीति और रक्षा सहयोग में रही हैं। उन्होंने बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) को भारत-बलूचिस्तान की साझा आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया।

ऑपरेशन सिंदूर की खुलकर सराहना

बलोच नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य ढांचे और आतंकी ठिकानों पर हमला साहसिक, न्यायपूर्ण और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम था।

79 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे में बलूचिस्तान

पत्र में कहा गया कि बलूचिस्तान पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के अवैध कब्जे, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहा है। मीर यार बलोच ने स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि बलूचिस्तान को स्थायी शांति और संप्रभुता मिल सके।

भारत को पूर्ण समर्थन का ऐलान

मीर यार बलोच ने कहा कि 6 करोड़ बलूच नागरिक भारत और उसकी सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने शांति, विकास, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदारी की इच्छा जताई।

पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर गंभीर चेतावनी

पत्र में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बताया गया। बलोच नेता ने चेतावनी दी कि CPEC अपने अंतिम चरण में है और यदि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता सेनाओं को समर्थन नहीं मिला, तो आने वाले महीनों में चीनी सेना की तैनाती बलूचिस्तान में हो सकती है, जो भारत और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनेगी।

ठोस रणनीतिक सहयोग की अपील

पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने कहा कि मौजूदा हालात में केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक रणनीतिक सहयोग की आवश्यकता है। भारत और बलूचिस्तान की साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

Karan Pandey

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