हिंदू आतंकवाद की साजिश ध्वस्त होने का दावा, कांग्रेस की राजनीति पर उठाए सवाल
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुंबई स्थित एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की विशेष अदालत ने 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस निर्णय के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इसे “हिंदू आतंकवाद की झूठी थ्योरी” करार दिया।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अलग – अलग बयान जारी की। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस ने केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए एक समुदाय को बदनाम करने का प्रयास किया।
रविशंकर प्रसाद ने कहा, “आज न्याय की जीत हुई है। कांग्रेस ने जिस ‘हिंदू आतंकवाद’ का झूठा नैरेटिव गढ़ा था, वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। यह केवल वोट बैंक की राजनीति थी।”उन्होंने आगे कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित, जो कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशनों में शामिल रहे, उन पर झूठे आरोप लगाए गए। वहीं, भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर आरोप लगाया गया कि ब्लास्ट में उनकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल हुआ।
रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में प्रताड़ित किया गया, जिससे उनका स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ और वह लंबे समय तक चलने में असमर्थ रहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस फैसले को सत्य की जीत बताते हुए कहा,
“सच्चाई कितनी भी देर से सामने आए, लेकिन झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती। यह फैसला कांग्रेस के नापाक इरादों की पोल खोलता है।”
मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस से माफी की मांग करते हुए कहा,
“जो लोग सेना के अफसरों और संतों को आतंकवादी साबित करना चाहते थे, उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।”
मालेगांव ब्लास्ट 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में हुआ था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित, प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत कुल 7 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
एनआईए कोर्ट के इस फैसले से भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार मिल गया है, जबकि कांग्रेस पर नया सियासी दबाव बना है।
यह मामला आने वाले चुनावी माहौल में एक बार फिर ‘हिंदू आतंकवाद’ बनाम ‘राजनीतिक साजिश’ की बहस को तेज कर सकता है। भाजपा अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है और नैतिक जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।
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